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कटान में समाई संतों-पुरोहितों की सौ बीघे से अधिक भूमि

 

रेलवे पुल के उत्तरी हिस्से में कटान से भूमि आवंटन में दिक्कतें आ सकती।

(अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। गंगा में कटान की वजह से माघ मेले के ले-आउट पर असर पड़ गया है। सौ बीघे से अधिक भूमि कटान में चली गई है। इससे प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं, प्रगायवाल तीर्थपुरोहितों को कहां और कितनी भूमि मिलेगी अभी तय नहीं हो सका है।
खाक चौक के बाद दंडीबाड़ा आचार्यबाड़ा, प्रयागवाल पुरोहितों के सैकड़ों शिविरों की जगह इस बार बदलनी पड़ सकती है।
रेलवे पुल के उत्तर कटान का दायरा तेजी से बढ़ने से भूमि आवंटन से पहले परेशानी खड़ी होने लगी है। माघ मेले में समूहों में बसने वाली तीन प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के अलावा प्रयागवाल तीर्थपुरोहितों की भूमि इस बार हर सेक्टर दो और तीन में कटान की भेंट चढ़ गई है। इससे भूमि के समायोजन पर पेंच फंसने लगा है। ऐसी आध्यात्मिक संस्थाएं चाहती हैं। कि उनकी भूमि एक ही जगह पर आवंटित की जाए। ताकि संतों के शिविरों को बसाने में किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। खाक चौक की 20 बीघे से अधिक भूमि कटान में समा गई है। इस दौरान कटान में बही भूमि का समायोजन उन्होंने उसी क्षेत्र में कराने का आग्रह किया।
इसी तरह माघ मेले में बसने वाली सबसे बड़ी संस्था दंडी स्वामी नगर दंडीबाड़ा की भी 25 बीघे से अधिक भूमि कटान में बह गई है। इससे दंडीबाड़ा के 50 से अधिक शिविर प्रभावित होने की आशंका है। दंडीबाड़ा के भी संत चाहते हैं, उनकी भूमि का समायोजन एक ही स्थान पर किया जाए। इसी तरह आचार्यबाड़ा और प्रयागवाल तीर्थ पुरोहितों की भूमि भी रेलवे पुल के उत्तरी हिस्से में कटान से प्रभावित होने की वजह से भूमि आवंटन में दिक्कतें आ सकती हैं।

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