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काटे गए पेड़ों की जगह कितने पेड़- लगाए हाईकोर्ट

काटे गए पेड़ों की जगह कितने पेड़ लगाए
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी जानकारी
सड़कों के चौड़ीकरण मामले में काटे गए पेड़

( विनय मिश्रा ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रयागराज से दूसरे शहरों की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और शहर की सड़कों के चौड़ीकरण में काटे गए पेड़ों की जगह कितने पेड़ लगाए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी एवं न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने अलोपीबाग से हंडिया के बीच बन रहे सिक्स लेन हाईवे और नगर निगम की सीमा में 17 अन्य मार्गों के चौड़ीकरण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के खिलाफ दाखिल विधि छात्रों की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने इस याचिका को इसी मुद्दे पर पहले से दाखिल अन्य जनहित याचिकाओं के साथ संबद्ध कर 19 जनवरी को पेश करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट का कहना है कि पेड़ों की कटाई के मामले में टीएन गुडावर्मन केस में दी गई सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किया जाए। गाइडलाइन में कहा गया है कि जितने पेड़ काटे जाएं उसके दोगुने लगाए जाएं। पर्यावरण संतुलन के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन आवश्यक है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कई राज्यों में इन निर्देशों का पालन कर रहा है।
अक्षय प्रकाश,अनुराधा गुप्ता आदि विधि छात्रों ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि अलोपीबाग से हंडिया के बीच सिक्स लेन हाईवे और शहर के भीतर 17 मार्गों को चौड़ा करने के क्रम में पेड़ों को काटने से रोका जाए। कोर्ट से जिलाधिकारी और वन विभाग को निर्देश देने की मांग की गई है कि इन पेड़ों की कटाई की अनुमति न दें। जहां बड़े पेड़ सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे हैं, वहां उन्हें काटने की बजाय आधुनिक तकनीक से दूसरे स्थान पर पुनस्थार्पित किया जाए। यह भी मांग की गई कि सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर काटे गए पेड़ों और लगाए गए पेड़ों का ब्योरा तलब किया जाए। राज्य सरकार के अधिवक्ता का कहना था कि इसी मुद्दे को लेकर पहले से कई जनहित याचिकाएं लंबित हैं। उन पर कोर्ट ने निर्देश दिए हैं। नियमित रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जा रही है। इस याचिका को भी उन्हीं याचिकाओं के साथ संबद्ध कर सुनवाई की जाए।

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