सनातनधर्मी उसी मंदिर को मानेंगे जो शास्त्र के अनुरूप प्रामाणिक धर्माचार्यों की देखरेख में निर्मित होगा- शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। त्रिवेणी मार्ग पर स्थित शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर में प्रवचन के दौरान कहा कि सनातनधर्मी उसी मंदिर को मानेंगे जो शास्त्र के अनुरूप प्रामाणिक धर्माचार्यों की देखरेख में निर्मित होगा। उनका कहना था कि प्रभु श्रीराम को भगवान मानने वाले और शास्त्रों की उपेक्षा करने वालों द्वारा कराया जा रहा निर्माण कार्यालय तो बन सकता है लेकिन उपासना का केंद्र नहीं बन पाएगा।
उन्होंने कहा कि रामालय न्यास सनातन धर्म के शीर्ष आचार्यों का ट्रस्ट है। यह केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या भूमि अधिग्रहण कानून 1993 के प्रावधानों के अनुरूप गठित है। उच्चतम न्यायालय ने रामजन्मभूमि मामले पर निर्णय देते हुए कभी यह नहीं कहा कि केंद्र सरकार नया ट्रस्ट बनाए। निर्णय में यही कहा गया है कि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के अनुरूप गठित ट्रस्ट को चुनकर भूमि सौंपे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की उपेक्षा कर पहले से विद्यमान सनातन धर्म के सर्वोच्च आचार्यों द्वारा बनाए गए रामालय न्यास की उपेक्षा कर केंद्र सरकार ने तानाशाही का परिचय दिया है। नये ट्रस्ट का निर्माण कर उस संगठन के लोगों को मंदिर बनाने का मौका दिया है जो श्रीराम को भगवान ही नहीं मानते। उन्हेंं स्वामी विवेकानंद और डॉ. आंबेडकर जैसा महापुरुष घोषित करते हैं।



