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थानों में महिला कर्मचारियों को क्या है सुविधाएं

हाईकोर्ट ने मांगी तत्काल उठाए गए कदमों की जानकारी, मूलभूत सुविधाएं तत्काल मुहैया कराने का दिया थ निर्देश

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से प्रयागराज सहित प्रदेश के सभी थानों में महिला कर्मचारियों के लिए टॉयलेट व अन्य मूलभूत सुविधाएं तत्काल मुहैया कराने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने इस मामले में जवाब मांगे जाने पर पुरानी योजना पेश करने को गम्भीरता से लिया है। साथ ही कहा कि प्रत्येक थाने में लेडीज टॉयलेट व वाशरूम की तत्काल आवश्यकता है लेकिन इस संदर्भ में कुछ नहीं बताया गया कि इसके लिए क्या कार्रवाई की गई है। इस पर सरकारी वकील की ओर से समय मांगने पर कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 22 फरवरी की तारीख लगा दी।
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने अंजली पांडेय व विभिन्न लॉ कॉलेजों के 12 विधि छात्र-छात्राओं की याचिका पर दिया है। कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के हवाले से कहा कि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। याचिका में कहा गया है कि पुलिस थानों में महिला कर्मचारियों और आगंतुक महिलाओं के लिए टॉयलेट, बाथरूम या उनके रहने की अलग से कोई सुविधा नहीं है। इससे महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रारम्भिक सुनवाई पर कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था। बुधवार को स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के 1425 पुलिस थानों मे से 1317 में महिला पुलिसकर्मियों के लिए हॉस्टल बनाने की योजना मंजूर की है। इसमें चार महिलाओं के लिए एक टॉयलेट व बाथरूम की व्यवस्था की जाएगी।51 थानों में निर्माण हो भी रहा है।इसका बजट भी स्वीकृत किया गया है। विजिटर रूम में भी मूलभूत सुविधाए दी जाएंगी। योजना पूरी होते ही प्रदेश के सभी पुलिस थानों में मूलभूत सुविधाएं होंगी।

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