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माघ माह की पूर्णिमा भगवान विष्णु के पूजन के लिये समर्पित है- शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। माघ मेला दण्डी नगर क्षेत्र के नागेश्वर धाम शिविर में अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने माघी पूर्णिमा पर अपने वक्तव्य बताया की माघ माह की पूर्णिमा का धार्मिक शास्त्रों में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। इस साल यह पूर्णिमा 27 फरवरी के दिन पड़ रही है। माना जाता है कि इस दिन स्नान करने व दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही उन्हें मोक्ष प्राप्ति के साथ-साथ धन संतान, सुख-सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है। स्वामी महेशाश्रम ने कहा माघ माह की पूर्णिमा भगवान विष्णु के पूजन के लिये समर्पित है। इस दिन विष्णु जी की विधि-विधआन से पूजा करने वाले व्यक्ति से श्री विष्णु हमेशा प्रसन्न रहते हैं और हर कामना पूरी करते हैं। माघ पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि माघ पूर्णिमा के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नदी या तालाब में स्नान आदि कर निवृत्त होकर सूर्य मंत्र का उच्चारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा स्थल पर बैठकर व्रत का संकल्प लें और भगवान मधुसूदन की पूजा करें। इसके बाद मध्याह्न काल में गरीब व्यक्ति और ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें। दान में तिल और काले तिल विशेष रूप से दान में देना चाहिए। माघ माह में काले तिल से हवन और काले तिल से पितरों का तर्पण करना चाहिए, अच्छा होता है। स्वामी महेशाश्रम ने बताया कि माघ नक्षत्र के नाम से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति होती है। मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य रूप धारण करके प्रयाग में स्नान, दान और जप करते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस दिन प्रयाग में गंगा स्नान करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लिखे कथनों के अनुसार यदि माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है। स्वामी महेशाश्रम ने बताया माघी पूर्णिमा का स्नान कर हमारा कल्पवास समाप्त हो जाएगा । उसके पश्चात वह प्रयागराज से हरिद्वार के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।

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