अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के उपलक्ष्य में सेमिनार का आयोजन

‘‘प्रदर्शनकारी कलाओं में महिलाओं का योगदान’’
( विनय मिश्रा )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘‘प्रदर्शनकारी कलाओं में महिलाओं का योगदान’’ विषय पर सेमिनार का आयोजन आज केन्द्र के प्रेक्षागृह में किया गया। इस आयोजन में प्रयागराज के विभिन्न क्षेत्रों की कलाओं के प्रतिष्ठित वक्ताओं को आमंत्रित किया गया। जिसमें उपशास्त्रीय गायन विधा की सुपरिचित गायिका डॉं अंकिता चतुर्वेदी दोआबा क्षेत्र की प्रतिष्ठित लोक नृत्य की नृत्यांगना श्रीमती बीना सिंह, रंगमंच के क्षेत्र में प्रतिष्ठित एवं बहुचर्चित रंगकर्मी व निर्देशक सुश्री सुषमा शर्मा, उत्तर भारत के शास्त्रीय नृत्य कथक के बनारस घराने की ख्यातिलब्ध नृत्यांगना उर्मिला शर्मा, लोक विद, श्रीमती प्रभा सिंह व युवा रंगकर्मी ऋतिका अवस्थी को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के शुभारम्भ में आमंत्रित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर, कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। केन्द्र के प्रतिनिधि शील द्विवेदी द्वारा वक्ताओं को पुष्पगुच्छ तथा स्मृति चिन्ह भेट कर, केन्द्र परिवार व निदेशक रेनू सिंह की ओर से स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। साथ ही महिला सशक्तिकरण पर अपने विचारों से जनसमुदाय को अवगत कराया। कार्यक्रम के अगले पायदान पर डा० अंकिता चतुर्वेदी द्वारा उपशास्त्रीय गायन के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान एवं उनकी सहभागिता पर प्रकाश डालते हुए ठुमरी चैती ऐसे गायन विधाओं में महिलाओं के भागीदारी को पुरजोर तरीके से व्यक्त किया। वहीं रंगमंच के क्षेत्र में सुषमा शर्मा द्वारा अभिनय में महिलाओं की भूमिका पर विस्तृत रूप् से प्रकाश डालते हुए नाटक के क्षेत्र में महिलाओं की आज की भूमिका का बखान किया। कथक नृत्य के विभिन्न आयामों और पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उर्मिला शर्मा ने महिलाओं द्वारा शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अपने पैठ को बखूबी व्यक्त किया। लोकगीतों और लोक नृत्यों की बात करते हुए श्रीमती बीना सिंह व श्रीमती प्रभा सिंह द्वारा अपनी संस्कृति व सांस्कृतिक धरोहर में महिलाओं की सशक्त भूमिका पर अपने विचारों को व्यक्त करते हुए, समाज में इसकी व्यापक्ता पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित लोक गायिका सुश्री प्रभा सिंह द्वारा श्रम, देवी गीत व फाग की विविध अवधी शैलियों पर प्रकाश डालते हुए गीत भी प्रस्तुत किये। कार्यक्रम के अन्त में शील द्विवेदी द्वारा सभी आमंत्रित वक्ताओं के साथ उपस्थित दर्शकों व श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए ‘‘यत्र नारी यस्तु पूज्यन्ते समन्ते तत्र देवता’’ से कार्यक्रम को विराम दिया।



