धर्म के लिए मर जाना श्रेष्ठ है | धर्म मात्र एक है और वह है सनातन धर्म- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द

( अनुराग शुक्ला ) हसौद (अनुराग दर्शन समाचार )। छत्तीसगढ़ के गुंजिया (हसौद) स्थित श्री अद्वैत सन्यास आश्रम में आयोजित दो दिवसीय श्री ज्ञान भक्ति यज्ञ में उपस्थित सनातन धर्मावलम्बी श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वचन एवं मार्गदर्शन प्रदान करते हुए श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर यति सम्राट अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि
“स्वधर्मो निधनो श्रेय:, परधर्मों भयावहा:”
दूसरे तथाकथित धर्म को लालच या भय से अपनाने की अपेक्षा अपने सनातन धर्म में, सनातन धर्म के लिए मर जाना श्रेष्ठ है | धर्म मात्र एक है, और वह है सनातन धर्म | सनातन धर्म ही है जो सर्वत्र शान्ति और मानव मात्र के कल्याण की कामना करता है | पूज्य शंकराचार्य भगवान ने गर्जना करते हुए कहा कि इसाई मिशनरियाँ लालच और भय को हथियार बनाकर धर्मांतरण कराकर भारत में हिन्दुओं की जनसंख्या कम करने में लगी हैं। तो दूसरी तरफ मुसलमान इस्लामिक आतंकवाद, लव जिहाद को हथियार बनाकर भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की अपनी योजना पर काम कर रहा है | हमें यह विस्मृत नहीं करना चाहिए कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए मतिराम दास जैसे धर्म योद्धा के शरीर को आरे से चीरा गया और गुरू गोविन्द सिंह के पुत्रों को दीवार में चुनवा दिया गया, लेकिन उन्होंने यह सब यातनायें स्वीकार की, लेकिन सनातन धर्म नहीं छोड़ा | इन अन्तर्राष्ट्रीय साजिशों को हमें गहराई से समझकर सनातन धर्म के लिए लड़ने के लिए तैयार होना चाहिए । पूज्य शंकराचार्य ने उपस्थित सनातन धर्मावलम्बी श्रद्धालुओं से सनातन धर्म के लिए जीने मरने की सपथ दिलाई | इस अवसर पर मंच पर स्वामी तुरियानन्द जी महाराज ब्रह्मचारी स्वामी बृजभूषणानन्द जी महाराज श्री शम्भू जी सहित अन्य सन्त महापुरुष उपस्थित थे|




