भगवदप्राप्ति के विविध द्वारों की चर्चा में बापू श्री राम नाम को प्रभु तक पहुँचने का अंतिम द्वारा- पूज्य मोरारी बापू

हरिद्वार (अनुराग दर्शन समाचार)। महाकुम्भ 2021 के अंतर्गत श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार के सारस्वत परिसर में स्थित “मृत्युंजयमंडपम्” में पूज्य “आचार्यश्री” जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में विश्व वन्दनीय संत पूज्य श्री मोरारी बापू जी के श्रीमुख से श्रीराम कथा का ‘षष्टम दिवस’ सम्पन्न हुआ।
श्री हरिहर आश्रम हरिद्वार में
चल रही श्रीराम कथा के सप्तम दिवस में पूज्य मुरारी बापू जी ने कथा का आरम्भ साधकों की जिज्ञासा समाधान से किया !! सप्तम दिवस पूज्य बापूजी ने भगवान राम के पावन प्रसंगों को लिखते समय तुलसी की मनःस्थिति का सुंदर विवेचन किया। पूज्य मोरारी बापू जी कहते हैं कि अपने ईष्ट और आराधक प्रभु श्री राम के प्रति तुलसी की जो दीनता है अर्थात अपने लिए बार -बार ‘दीन’ शब्द का जो वो प्रयोग करते हैं, उसी उनकी सबसे बड़ी ताकत है उसी से उनके आराध्य श्रीराम उन पर द्रवित हो जाते हैं और अविलंब कृपा करने के लिए आतुर हो उठते हैं। “दीन वचन सुनि प्रभु मन भावा” !! भगवदप्राप्ति के विविध द्वारों की चर्चा में बापू श्री राम नाम को प्रभु तक पहुँचने का अंतिम द्वारा बताते है। पूज्य बापू कहते है कि उस द्वार के रक्षक और पालक स्वयं श्री हनुमान जी है जो माँ जानकी के आशीष अनुग्रह से राम भक्तों को भक्ति और सिद्धि प्रदान करते हैं। आज के कथा श्रवण हेतु पूजनीया महामण्डलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि जी, महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी राजराजेश्वरानंद जी,महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अपूर्वानन्द गिरि जी महाराज, संस्था के न्यासीगण सहित बड़ी संख्या में सन्त-साधक एवं श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।




