ATS Update: आतंकी हमले की साजिश का पर्दा फाश: क्या ? प्रयागराज से दहशतगर्दों के संपर्क में आया था मूलचंद, जानिए पूरी अपडेट्स

( अनुराग शुक्ला )ऊंचाहार ,रायबरेली (आरएनएस अनुराग दर्शन समाचार ) । देश के विभिन्न शहरों में दहशतगर्दी फैलाने की कोशिश में गिरफ्तार हुआ ऊंचाहार का मूलचंद व शाजू लाला बीते चंद महीनों में ही आतंकवादियों के संपर्क में आया था । इससे पहले वह गांव में ही रहकर मेहनत मजदूरी करता था । रुपए कमाने की लालसा उसे अतांकियों के संपर्क में ले गई और वह देश से गद्दारी के विदेशी साजिश में फंस गया था। एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए क्षेत्र के सलीमपुर भैरों गांव निवासी मूलचंद एक गरीब परिवार से है । दो भाईयों में सबसे बड़ा मूलचंद के परिवार में उसकी पत्नी के अलावा एक पुत्र और एक पुत्री है । हाल ही सम्पन्न हुए पंचायत चुनाव से पहले वह गांव के प्रधान के साथ मिलकर उनका कामकाज देखता था और मनरेगा के कार्यों में मुंशीगीरी करता था । किन्तु चुनाव में गांव में नया प्रधान चुने जाने के बाद वह इधर उधर काम की तलाश करता था । ग्रामीण बताते है कि उसे शराब और गांजे की लत थी । जिसके लिए वह रुपयों की तलाश किया करता था । इस बीच उसका प्रयागराज रिश्तेदारी में आना जाना अधिक हो गया था । उसके बाद उसकी माली हालत सुधरने लगी थी । ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि वह प्रयागराज में ही किसी ऐसे गैंग के संपर्क में आया था , जहां से उसे न सिर्फ रुपयों की जरूरत पूरी होने लगी थी , अपितु वह राष्ट्र विरोधी कार्यों में संलिप्त हो गया था । एटीएस व अन्य जांच एजेंसियां अभी उसके अन्य सुराग तलाश रही है । किन्तु गांव के लोगों की माने तो उसका दहशतगर्दी से रिश्ता मात्र कुछ ही महीनों पहले जुड़ा था । क्योंकि उससे पहले वह गांव में ही रहता था ।
*मूलचंद के साथ पूरे परिवार की बदल गई थी रंगत*
आतंकी साजिश में गिरफ्तार किए गए मूलचंद उर्फ शाजू के परिवार की रंगत कुछ माह से बदल गई थी । उसके गांव के लोग बताते है कि जो व्यक्ति मनरेगा का श्रमिक रहा हो , अचानक उसके पास धन की वर्षा होने लगी थी । जिससे न सिर्फ मूलचंद का रहन सहन बदल गया था अपितु उसकी पत्नी और बच्चों की भी रंगत बदल गई थी । इधर कुछ महीनों से उसकी पत्नी व बेटा कीमती मोबाइल फोन लेकर गांव में घूमा करते थे । अचानक आए बदलाव को लेकर गांव के लोग चकित अवश्य थे , कितू किसी को यह आशंका नहीं थी कि वह देश से गद्दारी करने वाले गैंग का सदस्य बन चुका है ।
*रात में देता था काम को अंजाम*
ऐसा समझा जा रहा है कि ऊंचाहार का मूलचंद अतांकवादियों को विस्फोटक आपूर्ति का हिस्सा रहा है । इसके लिए उसे अच्छी खासी रकम मिलती थी । यह काम वह रात में करता था । ग्रामीणों की माने तो वह अक्सर रात में एक या दो बजे उठकर कहीं जाता था । और फिर सुबह सात आठ बजे तक वापस आ जाता था । उसके बाद वह दिन भर गांव में ही रहता था । इसलिए जब उसकी गिरफ्तारी हुई तो गांव के हर ग्रामीण को यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि आखिर यह पूरे दिन गांव में रहने वाला व्यक्ति आतंकियों से कैसे जुड़ा था।
*हाल ही में एक सप्ताह लखनऊ में रुका था मूलचंद*
कुछ दिन पूर्व मूलचंद लखनऊ गया था । जहां करीब एक सप्ताह रुककर गांव आया था । वापस आने के बाद उसने गांव के लोगों को बताया था कि लखनऊ में वह जमीन की प्लाटिंग का काम करने लगा है । इधर उसके पास धन का आगमन शुरू हो चुका था , इसलिए ग्रामीणों ने उसकी बात पर सहज ही विश्वास कर लिया था ।
*मूलचंद को गिरफ्तारी की थी आशंका*
एटीएस ने बड़ी सावधानी के साथ भले ही आतंकी साज़िश में शामिल मूलचंद उर्फ शाजू को गिरफ्तार कर लिया है किन्तु मूलचंद को अपनी गिरफ्तारी की आशंका पहले से ही हो गई थी । उसने गांव में अपने साथियों को यह बात बताई थी । उसने गांव में यह कहा था कि उसे पुलिस पकड़ेगी जरूर किन्तु वह छूट जाएगा । उसने ग्रामीणों को बताया था । कि उसके पास इतना पैसा है। कि कोर्ट में वह निपट लेगा।
*दस दिनों से एटीएस कर रही थी ऊंचाहार में कैंप*
*बिजली कर्मी बनकर मूलचंद के घर पहुंची थी एटीएस*
ऊंचाहार में आतंकी गैंग का सुराग लगने के बाद एटीएस ऊंचाहार आ गई थी । और एटीएस की टीम ने यहां करीब दस दिन तक रुककर मामले में सुरागरसी कर रही थी । यहीं नहीं सलीमपुर भैरों गांव में एटीएस मूलचंद को तलाश रही थी , जबकि गांव में अधिकतर लोग उसे शाजू लाला के नाम से जानते थे , इसलिए एटीएस को थोड़ी दिक्कत हो रही थी । उसके बाद एटीएस के लोग बिजली कर्मी बनकर गांव में घर घर बिजली का बिल चेक करने लगे थे , बिजली बिल चेकिंग के दौरान मूलचंद के घर का पता एटीएस को मिल गया था। इसके बाद भी एटीएस ने सीधे मूलचंद पर हाथ नहीं डाला । पुलिस टीम उसकी हर गतिविधि का कई दिनों तक आंकलन करती रही । वह कहां जाता है , भागने की दशा में वह कहां छिप सकता है ? इन सारी संभावनाओं के एक एक विंदू पर मंथन के बाद एटीएस ने आप्रेशन को अंजाम दिया । यही कारण रहा कि दबिश के दौरान जिस घर में भागकर मूलचंद घुसा था , वहां पहले से ही एटीएस मौजूद थीं और वह आसानी से पुलिस के हत्थे चढ़ गया । दबिश के दौरान एटीएस के अधिकारियों ने उक्त बातें स्थानीय पुलिस से बताई थी । जिसे ग्रामीणों ने भी सुना था । ग्रामीणों ने बताया कि एटीएस के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस को गांव में ही जमकर सार्वजनिक रूप से फटकार भी लगाई थी ।
*परिजनों को भी ऐसी गतिविधि की नहीं थी आशंका*
दिल्ली पुलिस द्वारा आंतकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद एटीएस द्वारा रायबरेली जिन दो लोगों को पकड़ा गया हैं वह ऊंचाहार के अकोढिया गांव के निवासी हैं और आपस मे दोस्त हैं। अभी तक जो जानकारी सामने आई है उनमें मूलचंद लाला बेहद शातिर है, साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला लाला इंटर तक पढ़ा है, गांव में उसे लोग साजू नाम से जानते हैं।घर मे पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं और खेती ही उसकी आय का जरिया है।हालांकि एटीएस द्वारा पकड़े जाने से उसके परिजन व गांव वाले भी हैरान हैं और किसी को उसकी आतंकी गतिविधियों की भनक तक नहीं थी।लाला के परिचितों के अनुसार वह दो साल पहले तक गांव में मनरेगा में मुंशीगीरी का काम करता था,लेकिन एटीएस की गिरफ्तारी के बाद उसके विषय मे जो जानकारी सामने आ रही है वह बेहद चौकाने वाली है।दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि मूलचंद लाला मुम्बई के एक माफिया अनीस इब्राहीम के सीधे संपर्क में था और उसी ने मुम्बई के जान मोहम्मद शेख उर्फ समीर कालिया से उसका संपर्क कराया था।दावा है कि लाला को एक हैंडलर के रूप में इस्तेमाल करना था।लाला के लिए जिम्मेदारी थी कि वह अवध के जिलों में लोकेशन ट्रैस करके अपने खरतनाक मंसूबों को अंजाम देना था।जान मोहम्मद शेख को भी मुम्बई से गिरफ्तार किया जा चुका है।लाला के विषय मे स्थानीय स्तर पर जो जानकारी मिली है उसके अनुसार वह अक्सर घर से कुछ दिनों के लिए गायब हो जाता था,पूछने पर बताता था इस समय लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलिंग का व्यवसाय कर रहा है।अंदर खाने से जो जानकारी आ रही है उसके अनुसार लाला के तार मुम्बई गए लोगों से उसके सीधे संपर्क हो सकते हैं।संभावना है कि मूलचंद लाला का काम हैंडलर का था,इसके अलावा जो जानकारी आई है कि मूलचंद लाला का प्रायगराज काफी आना जाना रहा है और आशंका है कि उसके तार इन लोगों से जुड़े हो सकते हैं।लाला के घर मे पत्नी सुधा और सो एक बेटा व बेटी हैं जो नवीं व ग्यारहवीं में पढ़ते हैं।हालांकि मूलचंद लाला की पत्नी सुधा और भाई पुत्तू का कहना है कि मूलचंद बेहद साधारण इंसान है और घर पर ही खेती करता है।वह एंड्रॉयड फोन तक इस्तेमाल नही करता है,पुलिस के इस दावे उन्हें भरोसा नहीं है।इसके अलावा एटीएस द्वारा हिरासत में लिया गया दूसरा युवक मो फ़हीम मुम्बई में रहता है और उसका पूरा परिवार भी काफी पहले से वहां है।हालांकि दो सालों से फ़हीम गांव में ही है।एटीएस अभी मो फ़हीम के विषय मे जानकारी कर रही है और उसका खुलासा नहीं किया गया है।फ़हीम के पिता जब्बार शेख ने बताया कि पुलिस सुबह बेटे को ले गई है और किसी आंतकी गतिविधियों में उसका हाथ नहीं है।


