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बाँस के बने सामग्रियों ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया

श्रीराम की नगरी अयोध्या से पधारे कलाकारों द्वारा फरवही नृत्य को प्रस्तुत करते हुए दर्शकों की तालियों को बटोरा

(अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। परम्परा, विरासत एवं संस्कृति के अद्भुत समन्वय के साथ-२ माटी की भीनी महक राष्ट्रीय शिल्प मेले की पहचान हैं। मेले के पाँचवे दिन हजारों की संख्या में जन मानस ने शिल्प मेले में शिल्पगत सामग्रियों का क्रय किया व अनेकों शिल्पों से परिचित हुए। आयुक्त, प्रयागराज मण्डल ने मेले का भ्रमण करते हुए अनेक शिल्पकारों के उत्साह को बढ़ाया तथा उनसे निर्मित सामग्रियां भी क्रय की। इसी क्रम में अनेक गणमान्य व प्रतिष्ठित लोगों ने भी मेले में शिल्प को बढ़ावा देते हुए खरीदारियां की। मेले में एक तरफ जहाँ फलकारी और बाँस के बने सामग्रियों ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया, वहीं चटनी, आचार, पापड़ जैसी वस्तुओं की खरीददारी पर बल पड़ा। सायंकालीन सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस उप महानिरीक्षक, प्रयागराज सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी को केन्द्र निदेशक ने पुष्पपंुज भेंटकर व अंगवस्त्र देकर विभिन्न प्रान्तों से आये हुए कलाकारों की ओर से उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि द्वारा अपने आशीर्वचनों में सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने पर बल दिया गया तथा संगीत के विभिन्न पहलुओं को छूते हुए संगीत की बानगी से भी दर्शकों को परिचित कराया।
प्रस्तुति के शुभारंभ में छत्तीसगढ़ की युवा पाण्डवानी गायिका सुश्री सम्प्रिया पूजा द्वारा महाभारत कालीन कीचक वध के प्रसंग को छत्तीसगढ़ी गायन शैली में प्रस्तुत किया। राजस्थान के किशनगढ़ जनपद से पधारे कलाकारों ने बारात के आगमन पर अतिथियों के स्वागत में किये जाने वाले नृत्य चरी को प्रस्तुत किया वहीं बिहार के मगध अंचल से पधारे कलाकारों ने शिशु जन्म के अवसर पर परम्परागत तरीके किये जाने वाले सोहर नृत्य ‘‘जन्मे हैं, कुवर कन्हैया, बबुआ के’’ की प्रस्तुति दी साथ ही मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल से पधारे कलाकारों द्वारा देवी और देवताओं को समर्पित पारम्परिक गणगौर नृत्य की प्रस्तुति की गयी। श्रीराम की नगरी अयोध्या से पधारे कलाकारों द्वारा फरवही नृत्य को प्रस्तुत करते हुए दर्शकों की तालियों को बटोरा। राजस्थान के राजपूत स्त्रियों के घर के आंगन में ढोल और थाली की मधुर आवाज पर अपने पारम्परिक परिधानों से सुसज्जित होकर घूमर नृत्य की प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी सराहा। बिहार का झूमर व आजमगढ़ के कहरवा नृत्य की प्रस्तुति ने भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। लोकनृत्यों के श्रृंखला के बाद प्रयागराज की सुपरिचित गायिका सुश्री जया बोस द्वारा भजन व निर्गुण गायन की प्रस्तुति दी गयी, उसके पश्चात अपने गीतों की बानगी से दर्शकों को जोड़ते हुए प्रयागराज की सुप्रसिद्ध युवा सूफी गायिका सुश्री यशस्वी गुप्ता ने ‘‘मैं तो पिया से नैना व अली मोरे अंगना’’ से समा बांधा। कार्यक्रम के अन्त में केन्द्र निदेशक ने सभी उपस्थित दर्शकों एवं श्रोताओं के साथ मुख्य अतिथि का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।

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