श्री खाटूश्याम प्रभु का 31वौं वार्षिक महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया

(अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री श्याम सेवा ट्रस्ट एवं श्री श्याम मण्डल प्रयागराज के तत्वाधान में श्री खाटूश्याम प्रभु का 31वौं वार्षिक महोत्सव आज मारवाडी अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित हुआ। श्री खाटू श्याम जी की कथा महाभारत काल से जुडी है।
पाण्डव पुत्र भीम के पौत्र तथा घटोत्कच के पुत्र बर्वरीक हुए जो कि श्री कृष्ण द्वारा शीश
का दान मांगने पर अपना शीश काटकर भगवान श्री कृष्ण को अर्पित कर दिया। जिससे
प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने वरदान दिया कि कालयुग में तुम मेरे नाम अर्थात श्याम नाम से पुजे जाओगे तथा जैसे-जैसे कलयुग बढ़ेगा तुम्हारा नाम बढ़ेगा इसलिए इनको शीश के दानी के नाम से पुकारा जाता है। आज भारत वर्ष के कोने-कोने में श्री श्याम प्रभु का मंदिर स्थित है तथा भक्तों की
सभी आशाये पुरी हो रही है। अलग-अलग स्थानों पर इन्हें विभिन्न नामों से पुकारा
जाता है1. खाटू में – श्री खाटू श्याम, 2 अहमदाबाद में – बलिया देवा, 3 काठमाण्डू में आकाश भैरव, 4. मण्डी हिमाचल में – कमरूनाम, 5. विंध्याचल में गणपाल बाबा,6.उडीसा में – बेलारसन 7. बुन्देलखण्ड में – टेसू इसके अलावा सभी भक्त गण इनकों विशेष रूप से हारे का सहारा (इनकी माँ ने इनसे प्रतिज्ञा ली थी कि तुम हारे का साथ दोगे) तीन बाण धारी भगवान (शिवजी के द्वारा तीन बाण दिये जाने पर), लीले घोड़े का अश्वार, लखदातार अहिलावती का लाल
(माता अहिलावती) कलयुग का अवतारी नाम से पुकारते है।
हर वर्ष फाल्गन शुल्क पक्ष में खाटू धाम (रींगस जिला-सीकर, राजस्थान) में इनका विशाल मेला लगता है। जिसमें देश ही नही अपितु विश्व के कोने-कोने से करोड़ों भक्त बाबा का दर्शन करते है तथा रींगस से खाटू पैदल चलकर(लगभग 22 किमी0) बाबा को निशान अपिर्त करते है।
31वें वार्षिक महोत्सव की शुरूआत संस्था के संस्थापक स्वर्गीय राधेश्याम जी कदोई
के पुत्र संजय कदोई तथा उनके परिवार द्वारा श्री श्याम अखण्ड ज्योति प्रज्वलित कर किया गया।
उसके उपरान्त भजन संध्या का कार्यक्रम चला जिसमें विशेष रूप से बाहर से आये संजीव शर्मा एवं सुश्री स्वाति निरखी द्वारा उपस्थित भक्तों को श्री श्याम भजनों से आन्नवदित किया गया जिसमें संगीत युसुफ एण्ड पार्टी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
महोत्सव में कलकत्ता के कलाकारों द्वारा कलकत्ता से मंगाये गये विशेष फुलों
की माला से बाबा का श्रृंगार किया गया तथा गणेश जी, शंकर जी सालासर बाला जी एवं झुझुन वाली दादी का भव्य दरबार सजाया गया। अन्य आयोजन में अखण्ड ज्योत, छप्पन भोग, माखन मिश्री, सवामनी प्रसाद एवं
फूलों की होली विशेष आर्कषण रहें।

