आपराधिक अपील को बल न देने पर निरस्त नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट
प्रयागराज( अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक आपराधिक अपील को सिर्फ जोर अथवा बल न देने के कारण खारिज नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा यह निर्णय एक पुनरीक्षण याचिका को मंजूर करते हुए दिया। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस केस में की जिसमें अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101 के तहत आरोपी की अपील को बल न देने के कारण निरस्त कर दिया था। वर्तमान मामले में, किशोर न्याय बोर्ड ने अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत दोषी ठहराया था। दोषसिद्ध के खिलाफ अपीलीय कोर्ट में अपील दायर की गई थी। अपील पर बल नहीं दिए जाने के आधार पर कोर्ट ने अपील निरस्त कर दिया था और दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। इस आदेश से दुखी होकर अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की और तर्क दिया कि अपील को खारिज करने का आदेश अवैध है। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता (याची) बिल्लू उर्फ आनंदी की दलील से सहमति व्यक्त की और हरियाणा राज्य बनाम जनक सिंह और गुरजंत सिंह बनाम पंजाब राज्य के फ़ैसले का हवाला देते हुए फैसला सुनाया कि एक आपराधिक अपील पर जोर अथवा बल न देने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है।
तदनुसार, कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका को मंजूर करते हुए पक्षों को सुनने के बाद इस मामले को कानून के अनुसार निपटाने के लिए न्यायालय को वापस भेज दिया। कोर्ट ने अपर सत्र न्यायाधीश को 3 महीने के भीतर अपील को तय करने का निर्देश दिया क्योंकि अपीलकर्ता अभी भी जेल में हैं।




