प्रयाग कुंभ पर खर्च होंगे 26.39 अरब रुपये, जानिए पिछली बार कितना था बजट

लखनऊ। इलाहाबाद का नाम “प्रयागराज” करने के बाद उप्र सरकार का पूरा जोर अगले साल वहां आयोजित कुंभ को भव्य बनाने पर है। 15 जनवरी को मकर संक्रांति से चार मार्च महाशिवरात्रि तक चलने वाले कुंभ में इस बार देश-दुनिया से 13 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आने की उम्मीद है।
यही वजह है कि 2013 के कुंभ से इसका विस्तार करीब दोगुना और बजट लगभग तीन गुना है। पिछला कुंभ शहर 14 सेक्टरों में 1936 हेक्टेयर में बसा था। इस बार इसे 3200 हेक्टेयर और 20 सेक्टरों में बसाया जाएगा।
2013 में इतना था कुंभ का बजट-
पिछले कुंभ का बजट करीब 11.42 अरब रुपये था। इसमें से लगभग 10.69 अरब रुपये ही खर्च हो सके थे। इस बार का बजट 26.39 अरब रुपये का है
कई विभागों के बजट में अप्रत्याशित वृद्धि-
पिछले कुंभ से इस बार कई विभागों के बजट में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। सूचना, पर्यटन व संस्कृति ऐसे ही विभाग हैं। कुंभ क्षेत्र में 9.63 करोड़ से स्थापित होने वाले सांस्कृतिक ग्राम के अलावा इस दौरान और भी ऐसे कई आयोजन होंगे जिनमें देश की बहुरंगी संस्कृति उभरकर सामने आएगी।
यही वजह है कि पिछले कुंभ में जिस संस्कृति विभाग के हिस्से मात्र 65 लाख रुपये आए थे उसे इस बार 40.64 करोड़ रुपये मिले हैं। कुंभ के प्रचार-प्रसार के लिए सूचना विभाग का बजट 10.70 से बढ़ाकर 55 करोड़ और पर्यटन विभाग का बजट 1.98 से बढ़ाकर 48.34 करोड़ रुपये किया गया है।
नाराजगी कुछ हद तक दूर होगी-
इलाहाबाद का नाम “प्रयागराज” करने के बाद मंदिर मुद्दे को लेकर नाराज रहने वाले लोगों की नाराजगी कुछ हद तक दूर हुई है। विश्व हिदू परिषद ने इसकी सराहना के साथ गुलामी के प्रतीक वाले अन्य ऐसी जगहों के नाम बदलने की मांग की है। कुंभ का सफल आयोजन इस नाराजगी को कुछ हद तक और कम करेगा।
तब मंदिर की मांग करने वाले सरकार के इस तर्क से भी सहमत होंगे कि राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण मंदिर निर्माण के लिए हम कानून नहीं ला सके। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं।


