भैरव की पूजा के साथ नवरात्रि में तांत्रिक साधना का समापन

धर्म डेस्क। भैरव की पूजा के बिना महाविद्या की आराधना अधूरी रहती है। तंत्र-मंत्र की सिद्धियों से जुड़े लोगों को विशेषकर नवरात्रि में भैरव की पूजा अवश्य करना चाहिए।
जिस तरह देवी दुर्गा अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं उसी तरह भगवान भैरव भी समस्त प्रकार की सिद्धियों के दाता हैं।। तांत्रिक और देवी ग्रंथों में भैरवनाथ का वर्णन मिलता है। यह कहना है महंत बजरंगमुनि उदासीन महराज का।

कुल 64 भैरव
अनेक तांत्रिक और देवी ग्रंथों में भैरवनाथ का वर्णन मिलता है। शिवमहापुराण के अनुसार भगवान शिव के क्रोध से भैरवनाथ की उत्पत्ति हुई थी और इन्हें शिव गण के रूप में स्थान प्राप्त है। ग्रंथों में अष्ट भैरवों का जिक्र मिलता है। ये आठ भैरव आठों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य) का प्रतिनिधित्व करते हैं और आठों भैरवों के नीचे आठ-आठ भैरव होते हैं। यानी कुल 64 भैरव माने गए हैं।भैरव का नाम जपने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है

भैरव स्तोत्र का पाठ करें
प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को भैरव मंदिर में बैठकर भैरव स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं।
अक्सर हम महसूस करते हैं हमारे आसपास नेगेटिव वातावरण बन जाता है।
हम अचानक ही परेशान महसूस करने लगते हैं। ऐसे में भैरव का नाम जपने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। जन्मकुंडली में मंगल दोष हो, मंगल पीड़ा दे रहा हो तो किसी सिद्ध भैरव मंदिर में पूजा करवाएं। भैरव या देवी मंदिर में बैठकर भैरव नामावली का पाठ करने से क्रूर ग्रहों का दुष्प्रभाव समाप्त होता है।


