मेला समाचार

अतीक अहमद की जमानत निरस्त

राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल को अगवा करने व धमकी देने का मामला

2017 में हुई घटना में मिली थी जमानत

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । अपराध समाज के लिए हानिकारक कृत्य है भले ही पीड़ित अकेला व्यक्ति क्यों नही हो, जमानत पर रिहा करने का यह आशय नही कि वह रिहा होने के पश्चात पुनः अपराध करे, यह निष्कर्ष माननीयों के न्यायालय के विशेष न्यायाधीश अतीक अहमद की स्वीकृत जमानत को निरस्त करने की उत्तर प्रदेश सरकार की अर्जी पर दिया। एमपी एमएलए कोए के विशेष न्यायाधीश डॉ दिनेश चंद्र शुक्ल ने शासन की ओर से नियुक्त विशेष लोक अभियोजक विवेक कुमार सिंह एवं एडीजीसी सुशील कुमार वैश्य तथा अतीक अहमद के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद जमानत अर्जी निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपित को जमानत मिली रिहा होने के उपरांत अापराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा, पुलिस की आख्या के अनुसार 75 आपराधिक मुकदमे उसके विरुद्ध दर्ज हैं समस्त परिस्थितियों अपराध की गंभीरता को देखते हुए एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के प्रकाश में स्वीकृत जमानत निरस्त किए जाने योग्य है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में राजू पाल विधायक हत्याकांड के गवाह उमेश पाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसे अगवा कर लिया गया और राजू पाल हत्याकांड में मुकर जाने के लिए दबाव दिया गया उसे लिखा गया एक कागज दिया गया जिसे कहा गया कि इसे रख लो और यही पढ़कर अदालत में बयान देना है धमकी दी गई कि ऐसा नहीं करने पर उसकी बोटी बोटी काट डाली जाएगी।

Related Articles

Back to top button