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सात राज्यों के 16 कलेक्टर लेंगे विदेशी अल्‍पसंख्‍यकों की भारतीय नागरिकता पर फैसला

नई दिल्ली। सरकार ने सात राज्यों के 16 कलेक्टरों को विदेशी अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिक का दर्जा देने के लिए अधिकृत किया है। ये कलेक्टर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों की भारतीय नागरिक बनने की अर्जी पर निर्णय लेंगे।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार रायपुर, अहमदाबाद, गांधीनगर, कछ, भोपाल, इंदौर, नागपुर, मुंबई, पुणे, ठाणे, जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, लखनऊ, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के जिला कलेक्टरों को नागरिकता की अर्जी पर विचार को अधिकृत किया गया है।

कलेक्टरों को यह अधिकार नागरिकता कानून के तहत दिया गया है। कानून में संशोधन करके तीनों पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक वर्ग के ऐसे नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है जो छह साल से भारत में रह रहे हैं। पहले यह नियम 12 साल के निवास का था। ऐसे विदेशी नागरिकों के पास कोई दस्तावेज होना जरूरी नहीं है। लेकिन इस प्रावधान से असम समेत सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों को वंचित रखा गया है। वहां रहने वाले विदेशी लोगों के लिए नागरिकता का प्रावधान अलग है।

अधिसूचना में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभाग के सचिवों को भी नागरिकता की अर्जी पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया है। लेकिन इसके लिए उन्हें भी जिला स्तर से ही रिपोर्ट मांगनी होगी। गृह सचिव ऐसे जिलों के प्रवासियों को ही नागरिकता दे सकते हैं जिनके लिए गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कलेक्टरों को अधिकृत नहीं किया गया है।

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