श्रीराम जन्मभूमि पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता, राम मंदिर बनकर रहेगा

प्रयागराज। श्री मीता दास आश्रम हरिश्चंद्रपुर ठेकमा आज़मगढ़ के महंत बजरंगमुनि उदासीन महाराज राम मंदिर पर प्रश्न किये जाने पर बोले कि श्रीराम जन्मभूमि पर प्रश्नचिन्ह ही नहीं लगाया जा सकता, निश्चित रूप से राम मंदिर बनकर रहेगा।
चाहे इसके लिए पूरे संत समाज को शास्त्र के साथ शस्त्र ही क्यों न उठाना पड़े। पूरा संत समाज श्री राम जन्मभूमि के लिए किसी भी सरकार औऱ न्यायालय से भी दो-दो हाथ करने के लिए साम, दाम ,दण्ड, भेद हर तरीके से तैयार है क्योंकि जिस प्रकार हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को जब पता चला कि हमें स्वतंत्रता सिर्फ अहिंसा के बलबूते नहीं मिल सकती तो उन्होंने हिंसा का मार्ग अपना लिया, उसी प्रकार संत समाज भी अपने तेवर बदल सकता है।
महाराज जी ने समझौते और बीच के रास्ते के प्रश्न पर कहा कि अगर अयोध्या में कही भी मस्जिद बनाने का समझौता होता है तो,मक्का ,अजमेर,माहिम दरगाह,हाजी अली व देवबंद में भी राम मंदिर बनाने का फैसला साथ मे लाये सुप्रीम कोर्ट!
महंत जी ने आगे कहा कि वह स्वयं एक एक घर जाकर श्री राम मंदिर के लिए सभी से उनकी राय ले रहे हैं और आने वाले समय में अपने समर्थकों के साथ श्री राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या कूच करेंगे।
चाहे इस कार्य में उन्हें स्वयं के प्राणों को भी आहूत क्यों न करना पड़े।उन्होंने इस धर्मयुद्ध में “धर्म सर्वोपरि” का नारा भी दिया है तथा स्वयं सभी संतों एवं महात्माओं से मिलकर आगे की रणनीति तय करने में लगे हैं।


