हाई टेक सन्यासियों का संगम जानिये इस बार कुंभ की कुछ खास बातें

कुंभ 2019 (Kumbh Mela 2019) के आगाज में अब एक दिन शेष है। देश के अलग-अलग कोने से हाईटेक संतों का जमावड़ा लगने लगा है। इनमें से कोई फेसबुक पर लाइव प्रवचन दे रहाहै तो कोई लैपटॉप से संगम क्षेत्र के फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहा है। कई संत तो फोन पर बात करने के लिए ब्लू टूथ इस्तेमाल कर रहे हैं। आइए जानते हैं कुंभ में पहुंचे ऐसे ही कुछ साधु-संत के बारे में….
नागा संन्यासी लैपटॉप पर रहते हैं ऑनलाइन, करते हैं कैशलेस पेमेंट
– संगम क्षेत्र के सेक्टर नंबर 16 में इन दिनों नागा संन्यासी लैपटॉप चलाकार अपने शिविरों की गतिविधियों को ऑनलाइन करने में जुटे हैं। ये संत ऑनलाइन सामान मंगवाते हैं और भुगतान भी कैशलेस करते हैं।
– श्री मीताबाबा उदासीन आश्रम के पीठाधीश्वर बजरंगमुनि उदासीन ब्लूटूथ से बात करते हैं। इसके अलावा कुंभ में कैशलेस लेनदेन कर रहे हैं। टैबलेट से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। इनका शिविर सेक्टर 6 में है।
– महानिर्वाणी के युवा संत अवतारपुरी शिविर में अक्सर ड्रोन उड़ाते रहते हैं। शाम को पुल नंबर पांच पर जब ये ड्रोन उड़ाने पहुंचते हैं तो लोगों की भीड़ जमा हो जाती है।
– दंडीबाड़ा में स्वामी ब्रह्मा आश्रम, खाक चौक में विनैका बाबा हाईटेक होकर कुंभ क्षेत्र में पहुंचे हुए हैं। विनैका बाबा अपने शिविर में 24 सीसीटीवी कैमरा भी लगवाए हुए हैं।
– इसी तरह गुजरात के धर्मेन्द्र गुरु ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, पर सैमसंग की गैलेक्सी सीरीज का फोन इस्तेमाल करते हैं। वे कहते हैं इससे कहीं भी जाने के लिए रास्ता ढूंढना आसान हो जाता है।
– संत छोटे गिरी एप्पल का आईपैड यूज करते हैं। उनका कहना है ये ये भक्तों से कनेक्ट रहने का बेस्ट ऑप्शन है। वे फेसबुक पर भी हैं।
मौनी महाराज को देखने के लिए जुटती है भीड़
– मौनी महाराज 11 हजार रुद्राक्षों की माला पहनकर जब मेले में निकलते हैं, तो उन्हें देखने वालों की भीड़ लग जाती है। वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र अमेठी के परमहंस आश्रम के महंत हैं।
– वे रुद्राक्ष की करीब 500 मालाएं पहनते हैं। इनमें 11, 21, 51 और 108 तक रुद्राक्ष पिरोए हैं। वे करीब 100 मालाएं सिर पर बांधते हैं।
– बाबा का 11 हजार रुद्राक्ष का संकल्प करीब सालभर पहले पूरा हो चुका है और वे 51 हजार रुद्राक्ष धारण करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
आगे पढ़िए कुंभ से जुड़े कुछ इंटेरेस्टिंग फैक्ट्स…

इस बार 45 Km के दायरे में लगा है कुंभ मेला
– इस बार कुंभ मेला क्षेत्र 45 किमी के दायरे में फैला है। पहले यह 20 किमी के दायरे में होता था।
– कुंभ को पहली बार अंतरराष्ट्रीय आयोजन का दर्जा मिला है।
– शहर में 15 फ्लाईओवर-अंडरब्रिज, 264 सड़कों का चौड़ीकरण हुआ है। 22 पान्टून ब्रिज बनाए गए हैं।
– मेला में 1.22 लाख बायो टॉयलेट, 1300 हेक्टेयर में 94 पार्किंग बनाए गए हैं। 20 हजार डस्टबिन रखे हैं।
– शटल बस सेवा और ई-रिक्शा भी चलाई जा रही हैं। मेले में विभिन्न बैंकों के 40 एटीएम लगाए गए हैं।
– 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए गंगा और 4 अन्य पंडाल बनाए गए हैं।
– मेला क्षेत्र में रोज 500 सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पहली बार 15 लाख वर्ग फीट में दीवारें पेंट की गई हैं।
कुंभ मेले में खोए…तो घबराएं नहीं
– कुंभ में भी भारी भीड़ के बीच खो जाते हैं तो घबराएं नहीं। यहां आपकी मदद के लिए Lost and Found सेंटर बनाया गया है।
– ऐसे एक या दो नहीं बल्कि पूरे 15 सेंटर हैं जो आपकी पूरी मदद करेंगे। इसके लिए मोबाइल एप भी है जिससे और आसानी होगी।

कब से हो रहा है मेले का आयोजन
– कुंभ मेले का आयोजन वैसे तो हजारों साल पहले से हो रहा है। लेकिन मेले का प्रथम लिखित प्रमाण महान बौद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग के लेख से मिलता है जिसमें छठवीं शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के शासन में होने वाले कुंभ का प्रसंगवश वर्णन किया गया है।
प्रत्येक तीन वर्ष में आता है कुंभ
– नासिक,उज्जैन, हरिद्वार और प्रयाग इन जगहों पर हर 3 साल के अंतराम में कुंभ का आयोजन होता है, इसीलिए किसी एक स्थान पर प्रत्येक 12 वर्ष बाद ही कुंभ का आयोजन होता है।
अर्धकुंभ क्या है?
– अर्ध का अर्थ है आधा। हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 साल के अंतराल में अर्धकुंभ का आयोजन होता है। पौराणिक ग्रंथों में भी कुंभ एवं अर्ध कुंभ के आयोजन को लेकर ज्योतिषीय विश्लेषण उपलब्ध है।
– कुंभ पर्व हर 3 साल के अंतराल पर हरिद्वार से शुरू होता है। हरिद्वार के बाद प्रयाग, नासिक और उज्जैन में मनाया जाता है। प्रयाग और हरिद्वार में मनाए जानें वाले कुंभ पर्व में एवं प्रयाग और नासिक में मनाए जाने वाले कुंभ पर्व के बीच में 3 सालों का अंतर होता है।




