प्रयागराज। श्री राम लोचन स्वरुप ब्रह्मचारी जी महाराज के अन्न क्षेत्र पांडाल में चल रहे श्री मद्भागवत महापुराण के समापन दिवस की कथा मे भगवान कृष्ण और सुदामा के मित्रता का सजीव चित्रण करते हुए कहे कि जे न मित्र दुःख होई दुखारी तिन्हहि बिलोकत पातक भारी ।

भगवान अपने लीलाओं का संवरण कर के निज धाम को प्रस्थान किये परिक्षित को मोक्ष प्राप्त हुआ अंतरराष्ट्रीय कथाव्यास डॉ श्याम सुंदर पाराशर जी ने कहा कि भगवान सदैव गौ हित ब्राह्मण हित देवताओं का हित और सन्त हित के लिए अवतार ग्रहण करते हैं, क्योंकि ये चारों चार पुरुषार्थ ही है ब्राह्मण से धर्म गौ से अर्थ देव से काम और सन्त मोक्ष के दाता हैं।
इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित हो कर कथा का रसपान किये स्वामी जी श्री प्रबोधश्रम जी गुरुजी श्री सर्वेश स्वरुप ब्रह्मचारी जी आयोजक श्री काशी नाथ पांडेय जी नवनीत पांडेय शंकर लाल जी उपस्थित रहे।



