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स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा- जब तक गौरक्षा का समुचित कानून नहीं बन जाता वह छत्र और सिंहासन नहीं धारण करेंगे

प्रयागराज। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के पीठारोहण की रजत जयंती के उपलक्ष्य में माघ मेला में चल रहे 11 दिवसीय अनुष्ठान के तहत शनिवार को नागरिक अभिनंदन और भजन संध्या आयोजित हुए।

इसी क्रम में त्रिवेणी रोड स्थित उनके शिविर में शिव शक्ति महायज्ञ जारी है। इस अवसर पर शंकराचार्य जी ने कहाकि वह गौवध को लेकर पीठ के पूर्व शंकराचार्य स्वामी निरंजन देवतीर्थ के सपनों को पूरा करने के लिए कृतसंकल्पित हैं। जब तक गौरक्षा कानून नहीं बन जाता तब तक वह छत्र और सिंहासन नहीं धारण करेंगे।

ज्ञातव्य हो कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के पीठारोहण की रजत जयंती का कार्यक्रम बसंत पंचमी से प्रारम्भ हुआ। इस 11 दिवसीय अनुष्ठान में चारों वेदों एवं प्रस्थानात्रयी का पारायण पूर्ण किया गया। राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की महाआराधना, नित्य सहस्त्रार्चन एवं भगवान चंद्रमौलेश्वर का नित्य महारुद्राभिषेक चल रहा है।

इसी के तहत शनिवार को शंकराचार्य जी का नागरिक अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर गायकों ने भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। रजत जयंती के उपलक्ष्य में चल रहे इन सभी अनुष्ठानों का समापन 9 फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन होगा।

नागरिक अभिनन्दन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहाकि शंकराचार्य का पद कोई राजसी पद नहीं है। सुख सुविधा या अहंकार की पुष्टि का माध्यम भी यह नहीं है। इसका उद्देश्य अद्वैतवादी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करना है। आज से लगभग 2500 साल पहले भगवान आदि शंकराचार्य ने धरती पर अवतरित होकर छिन्नभिन्न हो चुकी वैदिक परम्परा को पुनर्स्थापित किया था।इसलिए उनको सनातन धर्म का पुनरुद्धारक भी कहा जाता है।

देश की चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना, वहां आचार्यों की नियुक्ति और उन आचार्यों को आदि शंकर के रूप में देखने को आदेशित करने का उद्देश्य वैदिक धर्म की रक्षा करना है, जिससे कोई विधर्मी सनातन धर्म और बैदिक संस्कृति को चोट न पहुंचा सके।

इस अवसर पर स्वामीजी ने पूज्य गुरुदेव पुरी के 144 वें शंकराचार्य स्वामी निरंजन देवतीर्थ के धर्मरक्षा के लिए किए गए संघर्षों को स्मरण किया। उन्होंने कहाकि वह अपने गुरुदेव के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्वामीजी ने विगत 25 वर्षों में दुनिया भर में फैले सनातन धर्मावलंबियों से मिले सहयोग के प्रति कृतज्ञता जताई।

स्वामीजी ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से आने वाले समय में धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहने की अपील की। उन्होंने पूर्वाचार्य की प्रतिज्ञा को याद दिलाते हुए कहा कि जब तक देश में पूर्णतया गोवध बन्द नहीं होता और गौपालन की समुचित व्यवस्था पूरी नहीं होती तब तक पीठ का आचार्य छत्र और सिंहासन धारण नहीं करेगा। ज्ञात हो कि पुरी के पूर्व शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ ने गौवध बंदी के लिए 72 दिनों तक दिल्ली में उपवास किया था और संकल्प लिया था कि जब तक देश में गौ रक्षा कानून लागू नहीं होता तब तक वह छत्र और सिंहासन धारण नहीं करेंगे।

शंकराचार्य देवतीर्थ के पीठारोहण की रजत जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे इस अनुष्ठान में देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आगमन जारी है।

कार्यक्रम में स्वामी इंद्रदेव आश्रम नागा बाबा पंच अग्नि अखाड़ा, महंत घनश्याम दास निर्मोही अखाड़ा, बाबा लंकेश्वर खाकी अखाड़ा, महाममडलेश्वर झंडा बाबा, रामानुजाचार्य गोपालाचार्य राजेश पांडेय, श्रीमती नीलम गुप्ता, विद्युत मजूमदार सहित जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों समेत देशभर से भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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