रामायण के संपूर्ण ज्ञाता एवं राम भक्ति के अधिकारी भगवान शिव

कुरुक्षेत्र (अनुराग दर्शन समाचार ) । श्री शंकराचार्य मठ रामायण के संपूर्ण ज्ञाता एवं राम भक्ति के अधिकारी भगवान शिव ज्ञानपीठ कुरुक्षेत्र स्थित आश्रम में भगवान श्री राम और भगवान शिव के आपसी प्रेम के बारे में बताते हुए जगतगुरु शंकराचार्य महेशाश्रम जी महाराज ने कहा कि राम कथा का सच्चा उत्तराधिकारी भगवान शिव है शिव का सात्विक अर्थ सत्य और त्याग है
सत्य अपने संकल्प से विचलित नहीं होता एवं त्याग से स्वयं की कोई इच्छा नहीं होती भगवान शिव के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने कहा कि संसार को विनाश से बचाने के लिए भगवान शिव ने समुद्र से निकला हलाहल विष पान कर लिया था।
अजन्मा अविनाशी होते हुए भी समाज सुधारक के रूप में अवतरित श्रीराम के धर्म स्थापना रूपी संकल्प में सहायता के लिए भगवान शिव ने वानर रूप धारण किया एवं नाना प्रकार के प्रताड़ना सहते हुए उन्होंने अपने जीवन को समर्पित कर दिया परंतु आज का मनुष्य सुख ऐश्वर्य एवं प्रतिष्ठा के अभिमान में झुकना नहीं चाहता।
जबकि प्रभु श्री राम की सानिध्यता प्राप्त करने के लिए महाराज मनु ने मुक्ति को ठुकरा कर पुनः मनुष्य बनना स्वीकार किया निरंतर प्रभु श्री राम दर्शन प्राप्त करने के लिए परम ज्ञानी देवर्षि नारद ने जो माया से मुक्त थे माया का वरणकर बंदर का स्वरूप स्वीकार किया इसलिए हम सब को भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए नित्य निरंतर प्रयत्न करना चाहिए!



