कचहरी के बन्द रहते हाई कोर्ट से सीधे 16 विदेशी जमातियों को मिली ज़मानत

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मरकज़ निज़ामुद्दीन दिल्ली से लौटे दो अलग अलग जमातों जिसमे 7 इंडोनेशियन व 9 थाईलैंड के जमातियों की जमानत उचच न्यायालय से स्वीकार हो गयी है,ये जमानतें न्यायमूर्ती सौरभ श्याम शमशेरी ने आरोपियों के वकीलों सय्यद अहमद नसीम व मुहम्मद खालिद को सुनकर स्वीकार किया,उक्त प्रकरण में दो अलग अलग एफआईआर थाना शाहगंज में 7 विदिशियों सहित 17 लोगों के विरुद्ध नामजद एफआईआर धारा 188,269,270,271,आई पीसी 3 महामारी अधिनियम,व 14 बी,14 सी में दर्ज की गई थी,जिसमे बाद में इलाहाबाद विश्विद्यालय के प्रोफेसर मो0शाहिद को भी 120बी का आरोपी बनाया गया था तथा करेली थाना के दूसरे प्रकरण में इन्ही धाराओं में 24 मार्च से ही मस्जिद हेरा में कोवरन्टीन किये गए 9 थाईलैंड के जमातियों व मस्जिद इमाम उज़ैफ़ा सहित सभी 30 आरोपियों को महबूबा पैलेस में कोवरन्टीन करने के बाद 21 अप्रैल को महबूबा पैलेस से ही गिरफ्तारी दिखा कर चालान कर दिया गया था, 7 इंडोनेशिन तब्लीगी जमात के लोगों व 2 अनुवादकों को अब्दुल्ला मस्जिद मरकज़ में छिपाने के लिए 9 लोगों को ज़िम्मेदार बताया गया था,करेली प्रकरण में इमाम उज़ैफ़ा व 2 अनुवादकों की जमानत पूर्व में ही सत्र न्यायालय से हो चुकी है तथा अब्दुल्ला मस्जिद के 11 संरक्षण देने वालों तथा अनुवादकों की जमानत भी पूर्व में सत्र न्यायालय से स्वीकार हो चुकी है,प्रन्तु कोविद 19 के दिशा निर्देशानुसार ज़िला न्यायालय के लगातार बन्द रहने के कारण विदेशी जमातियों की जमानत प्रार्थना पत्र सत्र न्यायालय में दाखिल नहीं हो सकी थी,
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय संदीप कुमार बत्रा बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व अन्य धरम सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी 2018,इलाहाबाद उचच न्यायालय की विधि व्यवस्था सूरज कुमार बनाम स्टेट ऑफ यूपी 2020 के साथ की जिला न्यायालय के बन्द रहते 439 दण्ड प्रक्रिया संहिता में उच्च न्यायालय में भी प्रार्थना पत्र दी जा सकती है,आरोपियों की ओर से दो प्रार्थना पत्र दाखिल की गयी,जिसमे कहा गया कि सभी आरोपियों पर संक्रमण फैलाने, वीज़ा का दुरुपयोग करने का आरोप है आरोपियों की ओर से कहा गया कि जब कई बार की टेस्टिंग में सभी निगेटिव पाए गए,जब स्वम् वो संक्रमित नहीं थे तो संक्रमण फैलाने का औचित्य नहीं, किसी प्रकार से वीसा के नियमों का उलंघन नही हुआ क्योंकि वीसा नियम के पैरा 15 में उल्लिखित है कि टूरिस्ट वीज़ा पर धार्मिक कार्यक्रमों में सम्मिलित हो सकते हैं,सबसे बड़ी बात ये है कि केंद्र सरकार द्वारा 2 अप्रैल को सभी डीजीपी को निर्देश जारी किया गया तथा प्रेस नोट जारी कर पूरे देश में जमातियों के विरुद्ध विभिन एक्ट में कार्यवाही को निर्देशित किया गया जो सबित करता है कि अपराध होने से पहले ही अपराधी बना दिया गया,सबसे आश्चर्य की बात ये भी है की सभी विदेशियों यहां रुकने की सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं तथा भारत सरकार की ऑफिशियल वेब साइड पर फॉर्म सी भी जो ज़रुरुरी होती है, 24 मार्च को ही अपलोड कर दिया था तथा एलआईयू व पुलिस को सूचित भी कर दिया गया था उनके द्वारा किसी प्रकार का कोई भी अपराध कारित नही किया गया है।
दोनों प्रार्थना पत्रों में जमानत का प्रयाप्त आधार पाते हुए थाना शाहगंज के मामले में इंडोनेशिया के इदरिस उमर, अदि कुस्तीना,समसुल हादी,इमाम साफी, सतिजो जोइडिनो,हेन्द्रा सिंम्बोलन,डैडीके इसकेन्डेर व थाना करेली के मामले में थाईलैंड के मोहम्मद मदाली, हसन पाचो,सिथि पोन, सुरस्क,अरसेनन, अब्दुल बसीर,अब्दुनलः,उपदान वहाब,रोमली कोली की जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर ली है।

