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दुष्कर्म केस के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में बड़ी कार्रवाई

सर्विलांस प्रभारी व इंस्पेक्टर हंडिया समेत पांच पुलिस कर्मियों को किया सस्पेंड

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दुष्कर्म केस के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई। जांच के दौरान फजीवाड़े में संलिप्तिता की बात सामने आने पर सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव इंस्पेक्टर हंडिया बृजेश सिंह समेत पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया।शेष तीन में से दो हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल हैं, जो एसओजी टीम में तैनात थे। कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।मामले की जांच एसपी गंगापार को सौंपी गई थी, जिन्होंने तीन दिन पहले ही अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी थी। सूत्रों का कहना है कि जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों इंस्पेक्टरों ने फर्जीवाड़ा करके कर्नलगंज में दर्ज दुष्कर्म के केस के गवाह ज्ञानचंद मौर्य को जेल भेज दिया। इससे पहले खेल करके हंडिया थाने में दर्ज दुष्कर्म के केस में उसका नाम खोला गया और फिर इसी आधार पर उसे जेल भेजने की कार्रवाई की गई।निलंबित किए गए दो हेड कांस्टेबल पन्नालाल व अजय यादव और कांस्टेबल केके यादव भी इस फर्जीवाड़े में शामिल रहे, जो इंस्पेक्टरों के कहने पर गवाह को शहर से पकड़कर हंडिया ले गए। यही नहीं, उसके कब्जे से बरामद स्कूटी पर ट्रक की नंबर प्लेट भी लगा दी थी। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही मिलने पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई। जिसके बाद उन पर कार्रवाई हुई।आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर से लगातार संपर्क में था संजय
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कई ऐसे सबूत सामने आए, जिससे फर्जीवाड़े में उनकी संलिप्तिता की बात सही साबित हुई। सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव की दुष्कर्म के आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव से लगातार बात होती थी और इसका खुलासा उसकी कॉल डिटेल रिपोर्ट से हुआ। गौरतलब है कि फर्जी तरीके से जेल भेजा जाने वाला ज्ञानचंद जिस दुष्कर्म के केस में गवाह था। उसका आरोपी सीएमपी डिग्री कॉलेज का असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव ही था। डीआईजी/एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर पांचों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं।

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