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एकपक्षीय आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश: गूगल व यू ट्यूब से विवादित सामग्री का वेब लिंक हटाने का मामला

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्च इंजन गूगल व यू ट्यूब से विवादित सामग्री और उसका वेब लिंक हटाने के सिविल जज सीनियर डिवीजन कानपुर नगर के एकपक्षीय आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने शिकायतकर्ता अरुण मिश्र से इस मामले में जवाब भी मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने गूगल आईसी और गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिकाओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को सुनकर दिया है।

गूगल आईसी और गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने याचिकाएं दाखिल कर कानपुर नगर की सेशन कोर्ट के 15 फरवरी 2020 और 14 सितंबर 2020 के आदेश को चुनौती दी है।

दोनों याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि सिविल कोर्ट ने स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश एकपक्षीय रूप से पारित किया है।

याचियों को पक्ष रखने और सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। याचियों को इस मामले में दाखिल दीवानी वाद की जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें कोई नोटिस प्राप्त हुआ।

वरिष्ठ अधिवक्ता श्री त्रिवेदी का कहना था कि दीवानी वाद और निषेधाज्ञा अर्जी में गूगल का जो पता दिया गया है, वह भी सही नहीं है। नोटिस जिसके पते पर भेजा गया वह गूगल का अधिकृत एजेंट नहीं है।

इसलिए सिविज जज सीनियर डिवीजन ने 15 फरवरी को याची के विरुद्ध स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश पारित करते हुए उसे विवादित सामग्री यूट्ब चौनल और गूगल से वेबलिंक हटाने का आदेश दे दिया।

इस आदेश की जानकारी होने पर गूगल की ओर से स्थगनादेश अर्जी दी गई लेकिन कोर्ट ने 14 सितंबर को वह अर्जी खारिज कर दी, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।

यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजीनियर अरुण मिश्र ने गूगल आईसी और यू ट्यूब के खिलाफ कानपुर नगर की सिविल कोर्ट में वाद दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि पूर्व में उनके विरुद्ध कुछ विभागीय कार्यवाही हुई थी।

उन सभी मामलों में उन्हें उत्तराखंड और दिल्ली के उच्च न्यायालयों से क्लीन चिट मिल चुकी है। इसके बावजूद गूगल या यू ट्यूब पर अरुण मिश्र का नाम सर्च करने पर उनके बारे में वही पुरानी सामग्री दिखाई जाती है, जिनमें वह बरी हो चुकी है।

मुकदमे में मांग की गई है कि गूगल को उनसे जुड़ी जानकारियां हटाने का आदेश दिया जाए। सिविल कोर्ट ने इसे लेकर दाखिल स्थायी निषेधाज्ञा की अर्जी एकपक्षीय रूप से स्वीकार कर ली है।

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