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पॉक्सो एक्ट के आरोपियों के जमानत प्रार्थनापत्रों पर नोटिस की समय सीमा तय

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध के आरोपियों के जमानत प्रार्थनापत्रों पर बाल कल्याण समिति को नोटिस देने की समय सीमा तय कर दी है। इस नोटिस के बाद ही हाईकोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दाखिल किया जा सकेगा।
न्यायमूर्ति अजय भनोट ने सिद्धार्थनगर के जुनैद की जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद नोटिस की गाइड लाइन तय करते हुए कहा है कि शासकीय अधिवक्ता कार्यालय को जमानत प्रार्थनापत्र का नोटिस प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर स्थानीय पुलिस अपने जिले की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को नोटिस तामील कराए और पांच दिनों के भीतर वह नोटिस पीड़ित बच्चे के परिवार वालों को उपलब्ध कराया जाए। जमानत प्रार्थनापत्र की सुनवाई के समय सीडब्ल्यूसी और स्थानीय पुलिस अपनी रिपोर्ट और जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। जमानत प्रार्थनापत्र को नोटिस देने के बाद दस दिन का समय पूरा होने पर सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश किया जाए।
कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि इस आदेश का पालन किया जाए और अनुपालन के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। कोर्ट ने सभी डीएम को भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सीडब्ल्सूसी की रिपोर्ट जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई के समय प्रस्तुत की जाए और इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने अपने निबंधन दफ्तर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पीड़ित बच्चे के परिवार वालों को जमानत प्रार्थनापत्र में उनके नाम से पक्षकार न बनाया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ित बच्चे की पहचान से संबंधित कोई जानकारी उसका पता, पास पड़ोस आदि की जानकारी जमानत प्रार्थनापत्र में न दी जाए।
शासकीय अधिवक्ता उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, हाईकोर्ट, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ, प्रमुख सचिव न्याय, उत्तर प्रदेश सरकार, डीजीपी यूपी को नोटिस देंगे।
महानिबंधक हाईकोर्ट इस आदेश को बच्चों को लैंगिग अपराधों से संरक्षण के मामलों के लिए गठित हाईकोर्ट की समिति और किशोर न्याय कानून की मॉनिटरिंग के लिए गठित समिति और उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जुनैद की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है।

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