सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को लेकर एसडीएम का यह आदेश हुआ रद्द

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि मृतक आश्रित कोटे में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस के आवेदन के लिए निर्धारित 45 दिन की समयसीमा का उद्देश्य अनावश्यक विलंब को रोकना है ।
ताकि कार्ड धारकों को परेशानी न उठानी पड़े। यह प्रक्रिया निर्देशात्मक है इसलिए आवेदन में विलंब होने और किसी अन्य को दुकान आवंटित न होने पर तो मृतक आश्रित के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।
इसी के साथ कोर्ट ने राजेश कुमार का प्रत्यावेदन एसडीएम छिबरामऊ (कन्नौज) द्वारा विलंब के आधार पर खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया है और उसके प्रत्यावेदन पर विचार कर लाइसेंस देने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने राजेश कुमार की याचिका पर दिया है।
याची के पिता भैयालाल की सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान थी। 31 जनवरी 2019 को उनकी मृत्यु के बाद याची ने मृतक आश्रित कोटे में दुकान के लाइसेंस के लिए आवेदन किया।
एसडीएम ने यह कहते हुए याची का आवेदन खारिज कर दिया कि आवेदन निर्धारित 45 दिन की समय सीमा के बाद प्राप्त हुआ है।
याची का कहना था कि उसने आवेदन समय के भीतर किया था लेकिन एसडीएम कार्यालय ने इसकी कोई रिसीविंग नहीं दी और न ही आवेदन पर कोई कार्यवाही की तो उसने रजिस्टर्ड डाक से दोबारा आवेदन भेजा, जिस पर एसडीएम ने समय सीमा का हवाला देकर उसका आवेदन खारिज कर दिया।
याची का कहना था कि दुकान का आवंटन किसी अन्य को नहीं किया गया है इसलिए उसके प्रत्यावेदन पर विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने इस मामले में सहानुभूतिपूर्ण नजरिया अपनाने की आवश्यकता बताते हुए एसडीएम का आदेश रद्द कर दिया और याची से आवेदन लेकर उसे दुकान का लाइसेंस देने पर विचार करने को कहा है।

