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अठारह साल बाद घर लौटी रामसखी

मानसिक तौर पर विक्षिप्त होने के बाद हो गई थी गायब

( विनय कुमार मिश्रा )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। लगभग 18 वर्षो से परिवार से बिछड़ी रामसखी लखनऊ स्थित राजकीय महिला शरणालय से घर पहुंचती उससे पहले ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। धनूपुर विकास खंड के खड़हरा गांव निवासी रामसखी देवी पत्नी राजेंद्र प्रसाद पटेल 21 अक्टूबर 2002 में मानसिक तौर पर विक्षिप्त होने के कारण अचानक घर से गायब हो गई थी। अठारह साल बाद लखनऊ स्थित राजकीय महिला शरणालय में रामसखी के होने का पता चला तो परिवार के लोगों का खुशी का ठिकाना न रहा।
पति समेत कई लोग सोमवार को लखनऊ पहुंचे थे। मंगलवार को उन्हें घर लाया जा रहा था। अंदावा पहुंचने के साथ ही रामसखी के पेट में तेज दर्द होने लगा। इस पर रामसखी को सराय ममरेज थाना क्षेत्र के कसौझा गांव स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहां उनका इलाज कराया जा रहा है। अस्पताल में ही परिवार के लोग मिलने पहुंचे। काफी संख्या में गांव के लोग तथा रिश्तेदार भी पहुंच गए थे।
रामसखी से मिलने उनका सबसे छोटा बेटा पवन जो उस समय मात्र छह माह का था भी पहुंचा। मां को देख बेटे की आंखें भर आईं। मां को पता चला कि पवन उसका छोटा बेटा तो वह भी फफक पड़ी। उसने बेटे को गले से लगा लिया। मां-बेटे लिपट कर जोर-जोर से खुशी से बिलख पड़े। वहीं बड़ी बेटी साधना, राधना को देख भी रामसखी बेड से उठ खड़ी हुई। बच्चों और मां के मिलन को देख वहां मौजूद लोग विभोर हो गए। राजेंद्र के बहनोई रामसेवक रामसखी को लेकर अपने घर फूलपुर थाना क्षेत्र के टटिहरा गांव चले गए।
दरअसल रामसखी का इलाज राजकीय महिला शरणालय लखनऊ की अधीक्षक आरती ने कराया तो उसे अपने मायके हंडिया के ढोकरी गांव की याद आई। अपने पिता रामनरेश पटेल व भाइयों राजेश तथा दिनेश का नाम बताया। वार्डेन ने हंडिया पुलिस से पूछताछ कर उसके घर संदेश भेजा था। इसके बाद रामसखी को यहां लाया गया।

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