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सुख समृद्धि और यश वैभव का प्रतीक धनतेरस पर्व : स्वामी महेशाश्रम

( अनुराग शुक्ला )कुरुक्षेत्र (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री दण्डी स्वामी आश्रम नागेश्वर धाम पक्का घाट आश्रम में भक्तों सम्बोधित करते हुए श्री जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने बताया की, पुरे देश में कार्तिक मास कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन धन्वंतरि के अलावा, देवी मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाने की परंपरा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, धनतेरस के दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाना शुभ होता है। एक दिन दूत ने यमराज से बातों ही बातों में प्रश्न किया कि क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है? तो यमराज कहा कि जो व्यक्ति धनतेरस की शाम यम के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इसी मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन लोग दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने की परम्परा चलती आ रही है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र मंथन से धन्वंतरि प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे। तभी से धनतेरस मनाया जाने लगा। धनतेरस के दिन बर्तन, आभुषण इत्यादि खरीदने की भी परंपरा है। इससे सौभाग्य, वैभव और स्वास्थ्य लाभ होता है। धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पुजा कर के, मनुष्य

धन समृद्धि से परिपूर्ण होता है , सभी के जीवन में सुखशांति, यश वैभव प्राप्त हो, सभी को, धनतेरस एवं दिपावली के पावन पर्व पर, श्री जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी महाराज जी का, शुभ आशिर्वाद, एवं शुभकामनाएं

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