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भगवान नरसिंह की शोभायात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उड़ाया गुलाल

गोरक्षपीठाधीश्वर की अगुवाई में निकलने वाली परम्परागत भगवान नरसिंह की शोभा यात्रा शुक्रवार को उल्लास के साथ निकली। हालांकि गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इस यात्रा में प्रतिकात्मक रूप ही शामिल हुए।

श्रद्धालुओं को हाली की शुभकानाएं और आशीर्वाद देने के बाद उन्होंने अबीर-गुलाल उड़ा कर होली खेली।

उसके बाद गोरखनाथ मंदिर के लिए प्रस्थान कर गए। मुख्यमंत्री 9.20 बजे घंटाघर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा आयोजित भगवान नरसिंह की शोभा यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। उनके साथ महंत रामबिलास वेंदाती, महामंडलेश्वर संतोषदास सतुआ बाबा महराज, संघ के मुकेश खाण्डेकर, विधायक विपिन सिंह, मेयर सीताराम अग्रवाल, आरएसएस के विभाग कुटुंब परिवार प्रबोधन प्रदीप, विभाग प्रचारक बैरिस्टर, विभाग कारवां समिति आत्मा सिंह, प्रांत संपर्क अरुण मल्ल, शैलेश, विनोद, शक्ति, जयप्रकाश कुशवाहा, संतोष, नंद किशोर, अरुणेश शाही, समेत अन्य शामिल हुए।योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में नगरवासियों को पवित्र पर्व होली की हार्दिक बधाई और शुभकानाएं दी।

उन्होंने कहा कि देश की एकता और अण्डता के लिए इस पर्व को शांति-सौहार्द के साथ उसकी आस्था और पवित्रता के साथ मनाएं। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से होली के पर्व को मनाते आए हैं। सामाजिक समता और सामाजिक सौहार्द के इस पर्व को उल्लास के साथ एक सप्ताह तक मनाया जाता था लेकिन बदलते समय में यह त्यौहार दो दिन में सिमट गया है।

लेकिन यह दो दिन का पर्व भी बहुत ही महत्व रखता है।उन्होंने कहा कि होलिका दहन व्यक्तिगत जीवन एवं सामाजिक जीवन में आई विकृति को दूर होने का पर्व है। कुंठा और जड़ता से दूर होने का पर्व है। आह्वान किया कि पर्व और त्यौहार की व्यापक भावना को समझने। विकृतियों से मुक्ति का संकल्प ले।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से सिद्धि के मंत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने संगठित होकर गंदगी, जातिवाद, भ्रष्टाचार, अराजकता, अत्याचार से भारत को मुक्त करने का आह्वान किया है। कहा कि ऐसा भारत बनाए जिसमें सभी के सिर पर छत हो, रसोई गैस के कनेक्शन हो, हर घर में बिजली हो, हर हाथ में रोजगार हो।योगी ने हिदायत भी दी कि होली को हुड़दगई का प्रतीक न बनाएं। कोशिश करें कि यह पर्व अनंतकाल तक आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी रही। सलाह दिया कि कोई बीमार है, होली न खेलना चाहता है तो जबरन उस पर गुलाल, रंग न फेंके।

कहा कि अनुशासित समाज अनंतकाल तक समृद्धि हासिल करता है। रंग-गुलाल होली खेले लेकिन कीचड़ न फेंके। अनुशासितढंग से इस पर्व की मर्यादा को बनाए रखे। जाति एवं संप्रदाय का भेदभाव मिटा कर भारत की एकता और अखण्डता के लिए इस पर्व को शांति और सौहार्द के साथ मनाएं।

श्रीहोलिकोत्सव समिति ने शोभा यात्रा में नशा करके आने वाले लोगों पर पूरी तरह रोक लगा रखी थी। शोभा यात्रा में काले और नीले रंग का प्रयोग और गुब्बारा भी वर्जित रहा। श्रीहोलीकोत्सव समिति गीता नगर की मांग पर शोभा यात्रा के मार्ग के अतिक्रमण हटाए गए थे। प्रशासन से बिजली और जल की आपूर्ति भी सुनिश्चित किया।

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