वाराणसी। इलाहाबाद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 14 साल पहले चर्चित सिपाही सूर्यमणि मिश्रा हत्याकांड में आरोपित ज्ञानपुर के विधायक विजय मिश्रा समेत नौ आरोपियों को अपर जिला जज (तृतीय) राजीव कमल पांडेय की अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुकदमे को सुनवाई के लिए इलाहाबाद से वाराणसी स्थानांतरित किया गया था।
अभियोजन के मुताबिक भदोही के गोपीगंज निवासी सुरेंद्र मिश्रा ने सिविल लाइंस थाने में तहरीर दिया था। तहरीर में कहा गया था कि उनके भाई जो इलाहाबाद डीआईजी के यहां सिपाही के पद पर कार्यरत थे। वह अपने परिचित छात्रनेता विनोद तिवारी के साथ 14 मई 2003 की सुबह 9 बजे मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे। उसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें गोली मार दी। सूर्यमणि की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि विनोद तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया था।
पुलिस ने इस मामले में विधायक विजय मिश्रा व उनकी पत्नी तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष रामलली, मुन्ना मिश्रा, प्रेमशंकर मिश्रा, रामचंद्र मिश्रा उर्फ लाल साहब, जीत नारायण मिश्रा, गुलाब मिश्रा, नंदलाल पांडेय, संतोष दूबे व दिलीप मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले की सीबीसीआईडी जांच हुई। विवेचना के दौरान विधायक की पत्नी रामलली मिश्रा का नाम निकाल दिया गया। शेष अन्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
अदालत में बचाव पक्ष की तरफ से अधिवक्ता राधेश्याम चौबे, अशोक सिंह व रत्नेश्वर पांडेय ने पक्ष रखा। अदालत में बचाव पक्ष की तरफ से दलील दी गयी कि राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के चलते विधायक व अन्य को इस मामले में फंसाया जा रहा है, क्योंकि मृतक एक विधायक का समधी था। अदालत ने गवाहों के बयान व साक्ष्यों के अवलोकन के बाद आरोप सिद्ध न होने पर आरोपियों को बरी कर दिया।




