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बिगुल मज़दूर दस्ता का देशव्यापी हड़ताल

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। बिगुल मज़दूर दस्ता की ओर से देशव्यापी हड़ताल के दौरान इलाहाबाद में पीडब्ल्यूडी कार्यालय पर सभा करके जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया गया। सभा में राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद, दिशा छात्र संगठन समेत विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों-कर्मचारियों ने भागीदारी की।
संयुक्त राज्य कर्मचारी परिषद के जिला सचिव विनोद पांडेय ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के भत्तों आदि को एक-एक करके खत्म किया जा रहा है। जो लोग इस अन्याय के ख़िलाफ़ आन्दोलन कर रहे हैं, अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर उनका मुँह बंद कराया जा रहा है। बिगुल मज़दूर दस्ता के प्रसेन ने कहा कि मोदी सरकार ने दूसरी बार सत्ता में बैठते ही कर्मचारियों-मज़दूरो-छात्रों पर हमलों की रफ़्तार दो गुनी कर दी। बीएसएनएल, रेलवे, बिजली, बैंक से लेकर हर सरकारी विभाग को चौपट करके निजी कम्पनियों की झोली में डालने की तिकड़में तेज कर हो गयी। कोरोना महामारी के इस भयंकर दौर में भी सरकार ने जनविरोधी-कर्मचारी विरोधी नीतियों को धड़ल्ले से लागू करने का काम ज़ारी रखा। रेलवे, एलआईसी, ओएनजीसी समेत सरकारी विभागों और उपक्रमों को निजी हाथों में बेंचने का काम जो पहले ही चल रहा था, उसकी रफ़्तार और बढ़ा दी गयी। आपदा को अवसर में बदलने का नारा देने वाली मोदी सरकार ने कोरोना महामारी के इस दौर में एक तरफ़ पूँजीपतियों को तरह-तरह की छूट देने का सिलसिला जारी रखा। वहीं, दूसरी ओर कर्मचारियों और मज़दूरों की जेब खाली करने के लिए तरह-तरह की तिकड़में भिड़ाती रही। जून 2021 तक सरकारी कर्मचारियों के डीए पर रोक लगा दी गयी। उत्तर प्रदेश में बैठी योगी सरकार ने कर्मचारियों के छः भत्तों पर रोक लगा दी।
सभा के दौरान क्रान्तिकारी गीत गाए गए तथा प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के प्रमुख बिन्दु इस निम्न थे –
1. श्रमिक विरोधी चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए।
2. सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
3. केन्द्र तथा राज्य कर्मचारियों के डी.ए. से रोक तत्काल हटाई जाए।
4. नयी पेंशन स्कीम को रद्द किया जाए तथा पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए। सुप्रीम कोर्ट की लार्जर बेंच के आदेशानुसार वर्कचार्ज कर्मचारियों की सेवा जोड़कर पेंशन का लाभ दिया जाए।
5. सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने पर रोक लगाई जाए।
6. न्यूनतम वेतन रु. 20,000 किया जाए।
7. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में बदलाव रद्द किया जाए।
8. सभी विभागों में खाली पड़े पदों पर तत्काल भर्तियाँ की जाएं।
9. नियमित प्रकृति के कामों में ठेका व संविदा से रोक हटाई जाए।
10. स्कीम वर्कर्स – आँगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा, रसोइया आदि को स्थायी कर्मचारी का दर्जा एवं उनके समान सुविधाएँ दी जाएँ।
11. उत्तर प्रदेश में 3 साल तक श्रम कानूनों पर लगी रोक हटाई जाए। कार्यक्रम में राजकीय प्रेस मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के अध्यक्ष रामसुमेर, रमेश शंकर, आर.पी. सिंह, पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.पी. पाण्डेय, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंडल मंत्री राजेश्वर शुक्ला, अविनाश, जयशंकर, अरुण पांडेय, ओ.पी. सिंह, सुरेश कुमार, रवि, शिवा, नीशु, संजय, मोनिस, इमरान, अमित, अनवर, अंजलि आदि शामिल रहे।

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