प्राप्तांक में 20 फीसद बदलाव पर परीक्षक को नोटिस
राज्य विश्वविद्यालयों में चुनौती मूल्यांकन की व्यवस्था लागू
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (मुविवि) समेत उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में चुनौती मूल्यांकन की समान व्यवस्था लागू कर दी गई है। यह परीक्षकों के लिए चुनौती होगी। चुनौती मूल्यांकन में प्राप्तांक में 20 फीसद से अधिक बदलाव होने पर मूल परीक्षक को नोटिस भेजा जाएगा। यदि परीक्षक के तीन से अधिक प्रकरण एक ही प्रश्नपत्र में मिलते हैं तो संबंधित प्रश्नपत्र के मूल्यांकन का पूरा पारिश्रमिक रोक दिया जाएगा।
मुविवि कुलपति और प्रोफेसर राजेंद्र सिंह राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने बताया कि शासन की तरफ से चुनौती मूल्यांकन की समान व्यवस्था लागू करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजा गया है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी प्रश्नपत्र में पांच से अधिक प्रकरण आते हैं तो संबंधित परीक्षक को न्यूनतम दो साल के लिए परीक्षा संबंधी कार्यों से डिबार कर दिया जाएगा। 10 से अधिक प्रकरण आने पर परीक्षक के निजी विवरण पुस्तिका में प्रतिकूल टिप्पणी की जाएगी।
मुविवि कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर चुनौती मूल्यांकन की समान व्यवस्था लागू कर दी गई है। इस मूल्यांकन की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। इसके लिए सभी पाठ्यक्रमों के परीक्षार्थी को 300 रुपये प्रति प्रश्नपत्र आवेदन शुल्क जमा करना होगा। पहले चरण में मूल्यांकित उत्तरपुस्तिका की स्कैन प्रति देखने को मिलेगी। दूसरे चरण में मूल्यांकित उत्तरपुस्तिका का अवलोकन करने पर असंतुष्ट होने की दशा में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की सुविधा दी जाएगी। चुनौती मूल्यांकन के दूसरे चरण में कम से कम चार विषय विशेषज्ञों अथवा परीक्षकों की एक नामावली विभागाध्यक्ष के माध्यम से परीक्षा नियंत्रक द्वारा कुलपति को प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद परीक्षकों द्वारा दिए गए प्राप्तांक का औसत निकाला जाएगा।



