Latest

पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आमजन को खोखला किया-रेवती रमण सिंह

पेट्रोलियम पदार्थों को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाय या बिचौलिए हटें।
किसान आन्दोलन के बीच लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि।

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)।राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार हो रही मूल्य वृद्धि की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार हर कठिन परिस्थितियों को अवसर के रूप में लेता हैं जब जून में कोरोना महामारी चरम पर था तो लगातार रोज पेट्रोल के दाम मे वृद्धि किया और आज जब किसान नई कृषि नीति का विरोध सड़क पर उतर कर रहे हैं तो दूसरी तरफ मोदी सरकार लगातार पेट्रोल -डीजल के दाम बढ़ा रही हैं जिससें हर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं और मंहगाई में बेतहाशा वृद्धि हो रही हैं।
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग किया कि पेट्रोलियम पदार्थों को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाय जिससे पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी आये या पेट्रोलियम पदार्थों से बिचौलियों को हटाया जाए जैसा नई कृषि नीति पर मोदी सरकार सफाई दे रही हैं कि हम बिचौलिए खत्म कर रहे हैं तो पेट्रोलियम पदार्थों से बिचौलिए क्यों नहीं हटा रहे हैं अगर इसपर अमल हो तो भयंकर मंहगाई पर रोक लगाईं जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि कच्चा तेल रिफाइनरी से पेट्रोल के रूप में तैयार होने के बाद अधिकतम लागत आती हैं 30₹ प्रति लीटर और आज बाजार में 90₹प्रति लीटर के दाम पर बिक रहा है उन्होंने कहा कि 20₹ प्रति लीटर ट्रांसपोर्ट व पेट्रोल पंप कमिशन, स्टाफ की सैलरी हो सकतीं तो अधिकतम 60₹ प्रति लीटर पेट्रोल बिकना चाहिए पर बिक रहा है लगभग 90₹ प्रति लीटर पर यहाँ जो समझने की बात है कि असली खेल ये 30₹प्रति लीटर का हैं और भारत में लगभग 3लाख लीटर सिर्फ पेट्रोल की खपत हैं तो रोज इतना भारी भरकम रकम कहा और कैसे इस्तेमाल हो रहा है।
पूर्व सपा प्रदेश प्रवक्ता विनय कुशवाहा ने कहा कि तीन महीने पहले सोलविन कोल्ड पैरासिटामोल टेबलेट 38 रूपये प्रति पत्ता 10टेबलेट का मिलता था आज उसकि कीमत 46₹ प्रति पत्ता हो गई ये लगभग 22%की वृद्धि क्यों और कैसे हो गई इसकी कोई जवाब देहि हैं या तो सरकार के कंट्रोल से बाहर हो गए हैं निर्माता या तो सरकार की तरफ से ही उनको छुट दी गई हैं कि जितना जनता को निचोड़ सको निचोड़ लो यह तो एक छोटा सा उदाहरण हैं एक छोटे से उत्पाद का हैं ऐसे ही हर चीजों का हाल है जिसकी वजह से मंहगाई चरम पर है।लोहिया जी ने बहुत पहले “दाम बांधों ” का नारा दिया था आज उसकी आवश्यकता महसूस हो रही हैं।

Related Articles

Back to top button