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अखाड़ों को माघ मेला में संगम के निकट भूमि देना कल्पवासियो के लिए दुर्भाग्यपूर्ण

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। जनवरी माह में आयोजित माघ मेला में अखाड़ों को संगम के करीब भूमि देने के मेला प्रसाशन के निर्णय पर तीर्थ पुरोहितों ने असहमति जाताई है, तीर्थ पुरोहितों की राष्ट्रीय संस्था अखिल भारतीय तीर्थ महासभा प्रयागराज के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने इसे कल्पवासियो के साथ छलवा करने जैसा निर्णय बताया है। महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमितराज वैध ने बताया कि अखाड़ों का शिविर हमेशा कुम्भ और अर्धकुंभ मेला में ही लगाया जाता है, यदि अखाड़े माघ मेला में भी अपना शिविर लगाना चाहते हैं तो स्वागत है परन्तु माघ मेला में संगम के संनिकट बसने के प्रथम अधिकारी कल्पवासी ही हैं. और उन्हें ऐसे में संगम से दूर करना एक छलवा से कम नहीं है. महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि हमेशा कुम्भ और अर्धकुंभ मेला में अखाड़ों को संगम के करीब बसने के लिए कल्पवासियो को संगम से दूर बसाया जाता है, पर माघ मेला में हमेशा से माघ मेला सर्वप्रथम संगम के करीब तीर्थ पुरोहित समाज फिर पूज्य शंकराचार्य, खाकचौक, आचार्य बाड़ा और दण्डीबाड़ा के शिविरों में ही कल्पवासी एक माह ठहर कर अपना अनुष्ठान सम्पन्न करते हैं।12 वर्ष के कल्पवास कर यात्री का अनुष्ठान संपूर्ण होता है। कल्पवासी दिन में तीन बार स्नान पूजन आरती गंगा जी में करते हैं, ऐसे में माघ मेला में संगम के निकट कल्पवासी को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए, अखाड़ों को मेला क्षेत्र के अंतिम में बसाने की अपील करती है ।महासभा कोविड 19 के अंतर्गत मेला प्रसाशन पहले से ही कम यात्रीयों के आगमन की सूचना पहले से ही जारी कर रखा है, और आने वाले तीर्थ यात्रियों को गाइड लाइन के अनुसार आने रहने की योजना के लगातार सामने आ रही है। माघ मेला में संगम के करीब तीर्थ पुरोहितों की भूमि रहती है। इससे कल्पवासियो को संगम स्नान करने में शुलभता रहती है, यदि तीर्थ पुरोहितों के भूमि को अखाड़ों को दे दिया गया तो कल्पवासियो को भारी समस्या से जूझना पड़ सकता है. महासभा के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया है कि नये परम्परा की शुरुआत से पहले ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरी जी महाराज से मिलकर इसका समाधान हेतु मुलाकात करके कल्पवासियो के हितार्थ संगम के करीब अखाड़ों को भूमि न लेने का आग्रह करेगा. ताकी कोविड 19 के अंतर्गत मेला क्षेत्र में आने वाले तीर्थ यात्री कल्पवासियो को कोई असुविधा का सामना न करना पड़े.

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