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प्राथमिकी की निष्पक्ष विवेचना का आदेश देने की मांग के लिए अनुच्छेद 226 में याचिका करना उचित फोरम नहीं

 

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि प्राथमिकी दर्ज कराने या दर्ज प्राथमिकी की निष्पक्ष विवेचना का आदेश देने की मांग के लिए अनुच्छेद 226 में याचिका करना उचित फोरम नहीं है। इसके लिए उचित फोरम मजिस्ट्रेट अदालत है, जहां पीड़ित व्यक्ति सीआपीसी की धारा 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल कर सकता है। और मजिस्ट्रेट के समक्ष ऐसी अर्जी दाखिल की जाती है तो वह प्रथमदृष्टया संतुष्ट होने पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को यह भी सुनिश्चित करने का अधिकार है कि प्राथमिकी की जांच निष्पक्ष रूप से हो। यह निर्णय न्यायमूर्ति पंकज नकवी एवं न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने आगरा के अभिषेक कुमार मिश्र व चार अन्य की याचिका खारिज करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्र ने बहस की। खंडपीठ ने सकीरी वसु केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यदि हाईकोर्ट में मुकदमा दर्ज करने और मुकदमों में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर याचिकाएं दाखिल होती रहीं तो हाईकोर्ट इन याचिकाओं की सुनवाई के अलावा कोई दूसरा काम नहीं कर पाएगा। इससे उच्च न्यायालयों पर याचिकाओं का अनावश्यक बोझ बढ़ेगा। इसी के साथ कोर्ट ने याची को मजिस्ट्रेट न्यायालय में अर्जी पेश कर अपनी बात रखने का निर्देश दिया है।
याची का कहना था कि उसने आगरा के हरिपर्वत थाने में धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने आदि धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है। 28 सितंबर 2018 को प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद इसकी निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही है। उसने अधिकारियों को प्रत्यावेदन दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

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