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श्रीमद्भागवत में सनातन संस्कृति संस्कार समाज के स्वरूप का दर्शन मिलता है- शंकराचार्य

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। श्री मज्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में 9 दिवसीय आराधना महोत्सव के पहले दिन आज प्रभु हनुमान जी, गणेश जी, भगवान चंद्रमौलेश्वर, भगवान आदि शंकराचार्य,  मज्ज्योतिष्पीठोध्दारक जगदगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामीब्रह्मानंद सरस्वती  महाराज, स्वामी शंकराचार्य शांतानंद जी महाराज, शंकराचार्यस्वामी विष्णु देवानंद सरस्वती महाराज एवं मैदानेश्वर बाबा की पूजा आरती के पश्चात श्रीमद्भागवत महापुराण की पूजा के बाद भागवत कथा का प्रारंभ हुआ। उक्तअवसर पर पूज्य शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी नेबताया कि श्रीमद्भागवत पुराण नारायण का विग्रह है। यह सनातन संस्कृति संस्कारव समाज के स्वरूप का दर्शन मिलता है। उन्होंने बताया कि ज्योतिष पीठ के पूर्व आचार्य गुरु की स्मृति में यह अनुष्ठान प्रतिवर्ष किया जाता है। कथावाचक स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती  महाराज ने पूज्य शंकराचार्य  को माल्यार्पण कर आशीर्वादप्राप्त किया। दंडी स्वामी  विनोदानंद सरस्वती , ब्रह्मचारी आत्मानंद , विशुद्धानंदजी, पं० शिवार्चन उपाध्याय शास्त्री, पं० छोटेलाल मिश्र आचार्य, आचार्य छोटे लालमिश्र, विपिन मिश्रा, मनीष जी, आचार्य जितेन्द्र  आदि ने श्रीमद्भागवत महापुराणकथा के अंत में आरती एवं पूजन किया। तत्पशात 7:00 बजे सायं काल से अभिषेकात्मक रूद्रयाग (रुद्राभिषेक) अनुष्ठान किया गया।

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