चंद्रयान-3 में इविवि के पूर्व शोध छात्र की भागीदारी,प्रमोद के सुझाव को तवज्जो देगा इसरो
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इसरो के अति महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-3 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व शोध छात्र एवं कुंडा एमएएस पीजी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र के सुझाव को तवज्जो दी गई है। डॉ. मिश्र ने 8 सितंबर 2019 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर चंद्रयान-2 के विफलता के मुख्य कारणों पर अपने निष्कर्ष रखे थे। डॉ. मिश्र के सुझाए गए कारणों पर गौर करते हुए इसरो ने इन सुझावों को चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया है। इस संबंध में अंतरिक्ष भवन, भारत सरकार की ओर से 21 दिसंबर को पत्र से डॉ. मिश्र को इसकी जानकारी दी गई है।
डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र ने बताया चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव चुम्बकीय क्षेत्र है।
चंद्रयान-2 की विफलता पर रखे थे अपने निष्कर्ष
इसके साथ प्रति चुम्बकीय क्षेत्र भी है। इसरो ने इस तथ्य को ध्यान में न रखकर चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया था। चंद्रयान-2 की विफलता के कारणों में एक कारण यह भी है। इस बात को लेकर डॉ. प्रमोद ने 8 सितंबर 2019 को प्रधानमंत्री और इसरो का पत्र लिखकर अपने अनुभव और खामियों का जिक्र किया और अगले प्रोजेक्ट चंद्रयान-3 में इसका ध्यान रखने की मांग की।
डॉ. प्रमोद मिश्र के इस पत्र को इसरो के वैज्ञानिकों के समक्ष रखा गया।
डॉ. प्रमोद ने बताया कि चंद्रयान-3 में मेरे सुझाव को रेखांकित करते हुए आपेक्षित सुधार किया गया है। इसकी जानकारी प्रमोद को 21 दिसंबर को आंतरिक्ष भवन भारत सरकार से दिया गया है। जारी पत्र में लिखा गया है कि चंद्रयान-3 में आपके सुझाव को सम्मिलित करते हुए अपेक्षित सुधार किया गया है।



