
लखनऊ। सपा-बसपा गठबंधन चुनावों में कैसे काम करेगा? कार्यकर्ताओं-नेताओं के इस गठबंधन पर क्या विचार हैं? चुनावों में कैसे जातीय समीकरण साधे जाएंगे? इन तमाम बड़ी बातों के साथ सोमवार को बसपा सुप्रीमो मायावती की मीटिंग खत्म हुई. बैठक में गोरखपुर और फूलपुर में हुए उपचुनावों की जीत बसपा कार्यकर्ताओं में पॉजिटिविटी भर गई.
बसपा सुप्रीमों मायावती के साथ पार्टी कार्यालय पर हुई मीटिंग में गठबंधन का मुद्दा ही छाया रहा. सपा-बसपा गठबंधन को जमीन पर कैसे उतारा जाए और दोनो पार्टियों के जातीय समीकरणों पर कैसे काम हो? इस बात पर मंथन किया गया. साथ ही दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं में चुनावों के दौरान कैसे तालमेल बने? गठबंधन पर कार्यकर्ताओं की क्या राय है? इस बात का भी फीड बैक लिया गया. इस दौरान गोरखपुर-फूलपुर लोकसभा उप चुनावों में शानदार जीत के बाद बसपा कार्यकर्ता सकारात्मक उ्जा से लबरेज दिखे. मीटिंग में जोनल कॉडिनेटर, पदाधिकारी, सासंद, विधायक, पूर्व विधायकों समेत बड़े नेता मौजूद थे. वहीं बैठक से निकले नेताओं से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि बहन जी ने चुनावों की तैयारियों में जुट जाने के निर्देश दिए हैं. हालांकि गठबंधन के सवाल पर नेता कन्नी काटते ही नजर आए.
2019 आम चुनावों में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बड़े विपक्ष का आहृवान किया है. आज बसपा के पार्टी ऑफिस में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में मायावती ने महागठबंधन का फैसला किया है. इसके लिए मायावती ने अन्य पार्टियों से आगे आने की मांग की है. मायावती का कहना है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के अलावा अन्य पार्टियों को भी एकजुट होना होगा. तभी भाजपा को हराया जा सकता है और मोदी सरकार से सत्ता ली जा सकती है.
बता दें कि आज बीएसपी की समीक्षा बैठक थी. जिसमें सभी जोनल कॉर्डिनेटर शामिल हुए थे. लोकसभा उपचुनाव परिणाम और राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद यह पहली समीक्षा बैठक थी. ऐसे में मायावती के आंतरिक मीटिंग में महागठबंधन के लिए तैयार हो जाने के बाद संभावना जताई जा रही है कि वे जल्द ही समाजवादी पार्टी से इस बारे में चर्चा करें.




