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धर्मांतरण कानून की वैधता पर 25 को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के स्थानांतरण का इंतजार

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण प्रतिबंधित करने के लिए प्रदेश में बने कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 25 जनवरी की तारीख लगाई है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने इस संबंध में लंबित याचिकाओं के स्थानांतरण के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल होने के कारण दिया है।
सोमवार को कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की सुनवाई कर रहा है। वहां सभी याचिकाओं को स्थानांतरित कर एक साथ सुने जाने की अर्जी दाखिल की गई है इसलिए अर्जी तय होने तक सुनवाई स्थगित की जाए। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अंतरिम आदेश नहीं किया है और सुनवाई पर रोक नहीं है। कोर्ट को बताया गया कि अर्जी की सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई होगी। इस पर याचिका को सुनवाई के लिए 25 जनवरी को पेश करने का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि याचिका पर राज्य सरकार की तरफ से जवाबी हलफनामा दाखिल किया जा चुका है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने कानून के क्रियान्वयन पर अंतरिम आदेश नहीं किया है। याचिका में धर्मांतरण विरोधी कानून को संविधान के विपरीत और गैर जरूरी बताते हुए चुनौती दी गई है। कहा गया है कि यह कानून व्यक्ति की पसंद व शर्तों पर किसी भी व्यक्ति के साथ रहने व धर्म-पंथ अपनाने के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है इसलिए इसे रद्द किया जाए। इस कानून का दुरुपयोग भी किया जा सकता है।
राज्य सरकार का कहना है कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन से कानून व्यवस्था व सामाजिक स्थिति खराब न हो, इसके लिए यह कानून लाया गया है, जो पूरी तरह संविधान सम्मत है। इससे किसी के मूल अधिकारों का हनन नहीं होता बल्कि नागरिक अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे छल-छद्म के जरिये धर्मांतरण पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है।

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