नरेंद्र मोदी के खिलाफ एफआईआर की अर्जी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लगाई गुहार
अधिवक्ता की अर्जी पर थाने से आख्या तलब
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराए जाने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इलाहाबाद की अदालत में एक अर्जी दी गई है। अदालत ने थाने से आख्या तलब की है, जिसके प्रस्तुत होने पर अर्जी पर सुनवाई होगी। अर्जी में अंबुज शर्मा केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी व अरुण कुमार केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया है। यह अर्जी अधिवक्ता राकेश नाथ पांडे ने दी है। अदालत से मांग की गई है कि उनकी अर्जी स्वीकार कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने एवं विवेचना करने हेतु आदेशित किया जाए।
अर्जी में कहा गया है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी एवं केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी प्रधानमंत्री कार्यालय ने राकेश नाथ पांडे द्वारा जन सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत मांगी गई जानकारियां 26 जुलाई 2019 एवं 31 जुलाई 2019 को दी। 31 जुलाई 2019 की सूचना में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के चुनाव से संबंधित दौरे गैर आधिकारिक दौरों का हिस्सा हैं। इन दोनों पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा कोई खर्च नहीं किया जाता है। इंन दौरों पर प्रधानमंत्री द्वारा की गई हवाई यात्रियों का खर्चा पार्टी द्वारा वाहन किया जाता है। 6 जुलाई 2019 को प्रदान की गई सूचना में कहा गया है कि भारत का प्रधानमंत्री हर समय सरकारी कार्य में रत हैं। कार्यालय द्वारा ऐसा कोई अभिलेख नहीं तैयार किया जाता है जिसमें इसका ब्योरा हो कि प्रधानमंत्री ने किस विशेष क्षेत्र में समय व्यतीत किया अथवा कहां दौरा किया।
इन दोनों विरोधाभासी सूचनाओं का जिक्र करते हुए अर्जी में आरोप लगाया गया है कि सरकारी कार्य में रत होते हुए चुनावी दौरों में हिस्सा लिया जाता है जो कि सरकारी धन का खर्च है जो पूरी तरह अवैध है और भारतीय दंड संहिता की धारा 409 को आकर्षित करता है। इन सूचनाओं को आधार बनाकर दाखिल अर्जी में आरोप लगाया गया है कि सरकारी पद को ग्रहण करने के वक्त संविधान की जो शपथ ली जाती है यह उसका भी उल्लंघन है जो कि भारतीय दंड संहिता की धारा 166 को आकर्षित करता है। इन दोनों विरोधाभासी सूचनाओं को आधार बनाकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिए जाने की अदालत से प्रार्थना की गई है।



