मठ मछली बंदर शिविर में संपन्न हुई संतों की गोष्ठी, एकजुटता पर सभी ने दिया जोर- शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद

(आनंत पांडे)प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। सनातन धर्मावलंबियों और संत समाज को विभाजन से बचना चाहिए, यह समय एकजुट रहने का है। संतो के भेष में कुछ कालनेमि भी हैं। संत समाज को इनसे सावधान रहने की जरूरत है।
संत समाज को कालनेमि यों से सावधान रहने की जरूरत: स्वामी जितेन्द्रानंद
यह अपने स्वार्थ के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। यह बातें अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्र नंद सरस्वती ने माघ मेला क्षेत्र स्थित मठ मछली बंदर शिविर में आयोजित संतो की गोष्ठी में कही।
उन्होंने एक शंकराचार्य पर राम मंदिर के नाम पर चंदा वसूलने वाले और निर्माण के संबंध में भ्रामक बातें करने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि शंकराचार्य और उनके एक शिष्य ने पहले एक ट्रस्ट के नाम पर चंदा वसूला और सर्वोच्च अदालत से राम मंदिर के पक्ष में निर्णय आने के बाद एक ग्राम सोने की वसूली का अभियान चलाया। दूसरों से हिसाब मांगने वाले और राम मंदिर को विश्व हिंदू परिषद का कार्यालय कहने वाले शंकराचार्य और उनके शिष्य को माघ मेले में ही संतो के समक्ष अपने द्वारा वसूले गए धन का हिसाब रखना चाहिए।संत समिति के महामंत्री ने कहा कि यह वही शंकराचार्य हैं जिन्होंने कांची के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी पर ना सिर्फ मौन साध रखा था बल्कि उनके बारे में अभद्र बातें भी की थी। इन्हीं शंकराचार्य के शिष्य कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुंबई में हुए आतंकी हमले को हिंदू आतंकवाद का नाम देने का असफल और शर्मनाक प्रयास किया था। आतंकी अजमल कसाब यदि जिंदा नहीं पकड़ा गया होता तो यह अपने नापाक मंसूबे में कामयाब हो जाते। स्वामी जितेन्द्रानंद ने सभी संतो का स्वास्थ्य बीमा कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इसकी शुरुआत मठ मछली बंदर के काशी स्थित आश्रम से होगी। गोष्ठी में उपस्थित स्वामी बालक दास ने धार्मिक आयोजनों में बढ़ती फूहड़ता को रोके जाने और ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का आह्वान किया। गोष्ठी में चौसट्टी मठ के स्वामी परमात्मा बोध आश्रम, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमल देव आश्रम, टीकरमाफी आश्रम के स्वामी हरी चैतन्य ब्रह्मचारी आदि ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने अपने आशीर्वचन में संत समाज को एकजुट रहने की सलाह दी। संतों ने माघ मेला के सफल आयोजन के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रयागराज के स्थानीय प्रशासन व मेला के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। दो दिन पूर्व उत्तराखंड के चमोली में आई प्राकृतिक आपदा में प्राण गंवाने वाले लोगों को भी संत समाज ने श्रद्धांजलि अर्पित की। संतों ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण अभियान को रोकने के लिए संतों को गांव-गांव जाकर लोगों को सनातन धर्म की शिक्षा देनी चाहिए और गांव में ही चातुर्मास करना चाहिए।गोष्ठी में विभिन्न मठों से आए महंतों और दंडी सन्यासियों के साथ विश्व हिंदू परिषद के अशोक तिवारी और दिनेश जी भी मौजूद रहे। अशोक तिवारी में राम मंदिर निर्माण के बारे में विस्तार से संतों को जानकारी दी। गोष्ठी का संचालन अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के प्रवक्ता अरविंद स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया।




