वेदों की गति कालातीत होती है- स्वामी निश्चलानंद

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। वेदादि शास्त्रों को हम नहीं स्वीकार करेंगे तो ज्ञान व कर्म का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा। देहात्मवादियों में कमजोरी यह होती है कि वह इन्द्रियात्मवादी होते हैं। इंद्रियों के वशीभूत होते हैं। इंद्रियों की गति वर्तमान तक होती है जबकि मन की गति तीनों कालों में होते हैं। वेदों की गति कॉल गर्वित और कालातीत होती है। यह बातें गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने माघ मेला स्थित अपने शिविर में प्रेस प्रतिनिधि से बात करते हुए कही। शंकराचार्य ने कहा कि देह के नाश से जीवात्मा का नाश नहीं होता है। देह के भेद से जीवात्मा में भेद की प्राप्ति नहीं होती है। स्वामी निश्चलानंद में कहा कि भौतिकवादियों द्वारा बनाई गई विकास योजनाएं ध्वस्त हो जाती हैं क्योंकि वर्तमान तक में ही उनकी गति होती है।
मेले में कोलाहल पर जताया दुख:
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने माघ मेले में हो रहे कोलाहल पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि माइक आदि का उपयोग मर्यादा की सीमा में ही होना चाहिए। यहां से विश्व में कल्याण का संदेश जाता है। शासन का दायित्व है कि वह मर्यादा को बनाए रखे। शंकराचार्य ने कहा कि यदि शासन तंत्र जागरूक हो तो मेले में ऐसा कोलाहल न हो। शासन तंत्र चाहता है कि प्रामाणिक मनुवादी सनातनधर्मी न रहने पाएं क्योंकि वह सफल हो गए तो किसी की दाल नहीं गलेगी।



