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एफआईआर संग मनमानी गिरफ्तारी मानवाधिकार का उल्लंघन

 

नहीं दी जा सकती व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल अधिकार में कटौती की छूट

दहेज उत्पीडऩ के 60 फीसदी मामले अनावश्यक व अनुचित: हाईकोर्ट

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि एफआईआर दर्ज होते ही मनमानी गिरफ्तारी व्यक्ति के मानवाधिकार का उल्लंघन है। ऐसी गिरफ्तारी ही भ्रष्टाचार का स्रोत होती है। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल अधिकार में कटौती की मनमानी छूट नहीं दी जा सकती। जहां अपराध के पूछताछ के लिए अभिरक्षा में लेना जरूरी हो, गिरफ्तारी उसी स्थिति में की जानी चाहिए। यानी गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होनी चाहिए।
कोर्ट ने जोगिन्दर सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के हवाले से कहा कि दहेज उत्पीडऩ के 60 फीसदी मामले अनावश्यक व अनुचित होते हैं। अनावश्यक गिरफ्तारी के कारण जेल की 43.2 फीसदी सुविधाएं ऐसे बंदियों पर बेकार हो जाती हैं। इसलिए विशेष स्थिति में जरूरी होने पर ही गिरफ्तारी की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने झांसी के सीपरी बाजार थाने के दहेज उत्पीडऩ व आत्महत्या के लिए उत्प्रेरण के मामले में आरोपी धर्मेन्द्र की अग्रिम जमानत मंजूर करते हुए दिया है।
याची के अधिवक्ता अश्वनी कुमार ओझा के अनुसार याची की शादी 2004 में हुई थी। दहेज मांगने व आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप निराधार है। याची के पिता ने पांच दिसंबर 2020 की घटना के बाद नौ दिसंबर को ही पुलिस को पत्र लिखा कि उसकी बहू के मायके वाले गहने व नकदी ले गए हैं और केस करने की धमकी दे रहे हैं। इसके बाद भी एफआईआर दर्ज हो गई है। पुलिस इस मामले में मनमानी गिरफ्तारी कर सकती है इसलिए अग्रिम जमानत दी जाए। जबकि मृतका के मायके वालों का कहना है कि याची शराबी व जुआरी है। उसने पत्नी के गहने भी बेच दिए। उनकी लड़की ने जिंदगी से तंग आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है, जिसके लिए उसके पति व ससुराल वाले दोषी हैं।
कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज है। बिना जरूरत के गिरफ्तारी की जा सकती है। इसलिए पुलिस रिपोर्ट पर अदालत के संज्ञान लेने तक याची की गिरफ्तारी न की जाए। पुलिस 50 हजार के मुचलके व दो प्रतिभूति पर याची को गिरफ्तारी के समय रिहा करे। कोर्ट ने याची को शर्तों का पालन करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वह पुलिस पूछताछ के लिए उपलब्ध रहेगा, प्रलोभन या दबाव नहीं डालेगा, अदालत की अनुमति लिए बगैर देश नहीं छोड़ेगा, पासपोर्ट जमा कर देगा, शर्तों का पालन न करने पर जमानत निरस्त हो सकेगी। कोर्ट ने पुलिस को विवेचना शीघ्र पूरी करने का निर्देश भी दिया है।

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