श्रीशंभू अटल अखाड़ा ने लाव-लश्कर के साथ मंगलवार को अपनी छावनी में प्रवेश किया

( अनुराग शुक्ला ) हरिद्वार (अनुराग दर्शन समाचार )। संन्यासी अखाड़ों की पेशवाई के अंतिम चरण में श्रीशंभू अटल अखाड़ा ने लाव-लश्कर के साथ मंगलवार को अपनी छावनी में प्रवेश किया।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि व निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविद्रपुरी ने पेशवाई का स्वागत किया।
यह संन्यासी अखाड़ों की आखिरी पेशवाई थी। पेशवाई में शामिल साधु-संतों और नागा संन्यासियों के दर्शनों को सड़कों पर श्रद्धालुओं व नगरवासियों का सैलाब उमड़ा रहा। इसी के साथ सभी सातों संन्यासी अखाड़ों ने 11 मार्च को महाशिवरात्रि स्नान की तैयारियां आरंभ कर दी हैं।
कनखल के शीतला माता मंदिर से शुरू हुई अटल अखाड़े की पेशवाई की अगुआई अखाड़े के आचार्य महामंडलेर्श्वर स्वामी राजगुरु विश्वात्मानंद सरस्वती कर रहे थे। पेशवाई के सबसे आगे हाथी, उसके पीछे अखाड़े की धर्मध्वजा और फिर आचार्य महामंडलेश्वर का रथ चल रहा था। ऊंट व घोड़ों पर सवार संत व नागा संन्यासी पेशवाई की शोभा बढ़ा रहे थे। पेशवाई में सबके आकर्षण का केंद्र रहा तांडव नृत्य करते हुए चल रहे कलाकरों का दल। शिव बारात का प्रपंच रचे नागा संन्यासी भी हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे थे।
पेशवाई दक्ष मंदिर से यंत्र मंदिर होते हुए बूढ़ी माता मंदिर तिराहा, देशरक्षक औषधालय तिराहा व आरके मिशन अस्पताल से बंगाली मोड़ होते हुए संन्यास रोड स्थित अखाड़े की छावनी में पहुंचकर संपन्न हुई। इससे पूर्व, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि व निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविद्रपुरी ने दक्ष मंदिर पहुंचकर पेशवाई का स्वागत किया। जिलाधिकारी सी.रविशंकर, एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस, कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत, अपर मेला अधिकारी हरबीर सिंह, मेला आइजी संजय गुंज्याल आदि ने भी पेशवाई का स्वागत किया। पेशवाई में महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद सहित बड़ी संख्या में नागा संन्यासी व संत-महंत शामिल हुए।

