प्रयागराज में दक्षिण भारतीय परंपरा पर निर्मित एक मात्र शंकर विमान मण्डप मंदिर

मंदिर मे 51 शक्तिपीठ व 108 शालिग्राम द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थित है।
( अनुराग शुक्ला/अनंत पांडे) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। भगवान भोलेनाथ शिव शंकर के मंदिरों में प्रयागराज में दक्षिण भारतीय परंपरा पर निर्मित बेजोड़ एक मात्र शंकर विमान मण्डप मंदिर है। जो कि त्रिवेणी बांध पर लेटे हनुमान जी के समीप स्थित है। यह चार मंजिला मण्डपम द्रविड़ शैली में बनाया गया है। यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट बनावट एवं कलात्मक शैली के कारण प्रसिद्ध है। यह मंदिर कामकोटि पीठ के शंकराचार्य द्वारा जिनमें 86 वे शंकराचार्य श्री चंद्रशेखर सरस्वती जी,69वे शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी व 70वे श्री विजेंद्र सरस्वती जी के सहयोग से दिल्ली स्थित शंकराचार्य अकादमी ने इस मंदिर के निर्माण हेतु भूमि का क्रय किया। मंदिर का निर्माण कार्य 1970में आरम्भ हुआ। जो कि 1986में पूर्ण हुआ। इस मंदिर के निर्माण में लगभग 1करोड़ रुपये की लागत आई। इस मंदिर के वास्तुकार श्री एस.एम.गणपति रहे। यह मण्डप 130 फिट ऊँचा तथा 16 शक्तिशाली खम्बों पर खड़ा है।1986 में जयेन्द्र सरस्वती जी द्वारा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई। मंदिर के प्रवेश द्वार पर आदि शंकराचार्य एवं मण्डप मिश्र की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के प्रथम तल पर ब्रह्मदेव, उसके ऊपर काम तथा उसके ऊपरी भाग में कलियुग के वरद भगवान श्री बाला जी और सहस्त्रमुख परमेश्वर की लीलाओं सहित कई मूर्तियां शोभायमान है।मंदिर के मुख्य भाग का द्वार चन्दन की लकड़ी से बनाया गया है तथा दरवाजों पर कलात्मक शैलियों द्वारा मंदिर मे 51 शक्तिपीठ व 108 शालिग्राम द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थित है। यह मंदिर संगम प्रयागराज के तट पर स्थित है जिसके कारण इस मंदिर का महत्व अपने आप मे अलौकिक है।मंदिर को देखते ही इसकी निर्माण-शैली एवं महत्व का पता चल जाता है।इस मंदिर में विशेष रूप से दक्षिण भारत से आये श्रद्धालुगण अवश्य जाते हैं।संगम किनारे होने के कारण यह मंदिर कई मंदिरों के दर्शन का फल देता है।



