आईम्मा ए मासूमीन की मारेफत हासिल करना हो तो फरशे अज़ा पर आना होगा। मौलाना ज़ैगममुल रिज़वी

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। हजरत इमाम मुसा ए काज़िम (अ०स०) की शहादत पर दरियाबाद अहाता नवाब आग़ा अली खाँ मे माहे रजब की पच्चीसवीं को मौलाना आमिरुर्र रिज़वी द्वारा आयोजित असीरे बग़दाद का मातम के सिलसिले मे ईरान के क़ुम शहर से आए हुज्जतुल इसलाम मौलाना ज़ैग़मुल रिज़वी साहब क़िबला ने तफसीली मजलिस में इमाम मुसा ए क़ाज़िम की शहादत और उनपार ढाए गए मज़ालिम की दास्ताँ सुनाई।वहीं फज़ीलत बयान करते हुए कहा की पैग़म्बर ए अकरम से लेकर हज़रत हुज्जत तक एक ऐसा मुकम्मल सिलसिला है जो आईम्माए अतहार तक कयामत तक के लिए मुकम्मल मजमूआ है।मासूमीन वह होता है जो खुल जाए तो चौदह और सिमट जाए तो एक।कहा इमाम का हर अमल मरज़िये परवरदिगार होता है।आले मुहम्मद के दर से जो दूर हुआ वह समझो न आखिरत का रहा न दूनिया का।मौलाना के खिताबत से पहले रियाज़ मिर्ज़ा ने सोज़ख्वानी से माहौल को संजीदा बना दिया। नजीब इलाहाबादी के निज़ामत मे हुए असीरे बग़दाद के मातमी कार्यक्रम मे शायर तूफान दरियाबादी,शायर नायाब बलयावी ने इमाम की शान मे अशआर पेश किए।बाद मजलिस लाईटों को बुझा कर मोमबत्ती की रौशनी मे गुलाब और चमेली के फूलों से सजा इमाम मुसा ए काज़िम का ताबूत ज़ियारत को निकाला गया।अन्जुमन हाशिमया,अन्जुमन नक़विया व अन्जुमन मुहाफिज़े अज़ा क़दीम के नौहाख्वानो ने पुरदर्द नौहा पढ़ा तो मातमदारों ने मातम की सदा बुलन्द की।मजलिस में मौलाना सै० जव्वादुल हैदर रिज़वी,मौलाना सै०रज़ी हैदर,मौलाना मो०ताहिर,मौलाना अम्मार,मौलाना सग़ीर हसन खाँ,मौलाना आमीरुर रिज़वी,मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी,बाक़र नक़वी,हसन नक़वी,शफक़त अब्बास,ग़ुलाम अब्बास,सफदर अब्बास डेज़ी,शबी हसन शारुख,शादाब ज़मन,सै०मो०अस्करी,ज़ामिन हसन,मशहद अली खाँ,अब्बास ज़ैदी,जॉन ज़ैदी,यासिर सिबतैन समेत अन्य सैकड़ो लोग शामिल रहे।



