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तीस रोज़े हुए मुकम्मल दिखा ‘ईद का चाँद’

माहे रमज़ान की उनतिस को चाँद के दीदार नही हुए।लोगों में इस बात की खुशी रही की एक तो तीस रोज़े मुकम्मल हो गए दूसरे मुस्लिम समुदाय के किसी भी फिरक़े को चाँद का दीदार न होने की सूरत में सब मिल कर एक साथ ईद मनाएँगे।उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी ने बताया की मौलाना कल्बे सादिक़ साहब ने पहले ही २५ को ईद होने का एलान कर रखा था और हुआ भी यही।ईद के चाँद के दीदार के साथ लोगों मे जो खुशी झलकती थी वह इस साल ग़ायब थी।हर कोई कोरोना वॉयरस और लॉकडाउन के कारण मायूस था।उसकी वजहा यह नहीं थी की प्रशासन ने हम पर और हमारे मज़हबी उसूलों पर रोक क्यूँ लगाई बल्कि मायूसी उन लोगों के लिए थी जो इस महामारी और इस संकट में अपनो से दूर हैं या अपने वतन और अपने घर पहोँचने की जल्दी में राह में ही भूखे प्यासे सिस्टम के फेल होने पर दम तोड़ दिए।लोग ईद को इसी लिए सादगी से मनाने की हिदायत दे रहे हैं की बहोत से ऐसे लोग भी हैं जो रोज़ कमा कर अपने परिवार का भरण पोशण करते थे लेकिन दो माह से लगे लॉकडाउन के कारण उनके घर चूलहा नहीं जल रहा तो हम सब कैसे मनाएँ ईद हम कैसे पहने नए नए कपड़े ।यही नहीं अगर हम लोगों की उसी पैसों से मदद कर दें तो वह ईद की खुशी को दो बाला कर देगा और दिल को भी सुकून दे।

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