गुरू और इष्ट के प्रति अडिग आस्था व पूर्ण समर्पण फलदायी- ज्योतिष्ठपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)।श्रीमज्ज्योज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामीवासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज श्री ब्रह्मनिवास भगवान आदि शंकराचार्यमन्दिर, अलोपीबाग में ज्योतिष्पीठ के गुरू और आचार्यों की स्मृति में आयोजितनौ-दिवसीय आराधना महोत्सव में राधामन्दिर, राधामाधव विग्रह एवं पूर्व गुरूओं को माल्यार्पण करके पूजा-अर्चना, आरती एवं भोग अर्पित किया। उक्त अवसर पर उन्होंने कहा कि गुरू और इष्ट के प्रति अडिग आस्था व पूर्ण समर्पण ही भक्त के लिएनिश्चय ही फलदायी होता है। आज उन्होंने भगवान आदि शंकराचार्य चुंगी चौराहा केविग्रह का भव्य आरती-पूजन किया एवं प्रसाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की सुरक्षा के लिए भगवान आदि शंकराचार्य द्वारास्थापित नियम एवं प्रक्रियाओं से ही आज भी सनातन धर्म सुरक्षित और संचालित हो रहा है। सनातन धर्मावलम्बियों को अपने धर्म की रक्षा एवं संचालन के लिए स्वयंसचेत और प्रयासरत रहना चाहिए। आराधना महोत्सव के आठवें दिन श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा सुनाते हुएश्री स्वामी अखण्डानंद सरस्वती जी महाराज के कृपापात्र व्यास स्वामी श्रवणानंद जीने श्रीमद्भागवत की कथाओं से मनुष्य की वर्तमान जीवन-संदर्भो को जोड़ते हुएजीवन में आने वाले संकटों से बचने और उनका समाधान खोजने के रास्तों परप्रकाश डाला। संगीतमयी मधुर कथा में उपस्थित भक्तजन भागवत रस में गोते लगातेरहे। आचार्य छोटे लाल मिश्र, ब्रह्मचारी आत्मानंद, आचार्य विपिन मिश्र, मनीष जी, आचार्य यशोदानन्दन तिवारी, फूलचन्द्र दुबे एवं वरिष्ठ पूर्व सभासद श्रीउमेश मिश्र आदि भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। ज्योतिष्पीठ प्रवक्ता पं0 ओंकार नाथ त्रिपाठी ने बताया कि 28 दिसम्बर कोआराधना महोत्सव के सभी कार्यक्रमों का अन्तिम दिन है जिसमें श्रीमद्भागवत कथाअभिषेकात्मक रूद्रयाग एवं पूजा आरती सहित पूज्य व्यास श्रवणानन्द जी की विदाईप्रमुख है।


