मनुष्य के दुखों का कारण है उसकी अनंत इच्छा-आचार्य कौशल किशोर जी महाराज
गोंडा। ग्राम छतौरा (धमसडा) में चल रही सप्त दिवसीय श्री मद्भागवद् कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस राष्ट्रीय कथा ब्यास आचार्य कौशल किशोर जी महाराज ने भागवत कहते हुए कहा जैसे कुछ पाने की इच्छा कुछ बनने की इच्छा मनुष्य करता है, यही इच्छा दुख का बड़ा कारण है।

किसी को मान सम्मान की इच्छा होती है तो वह लगातार इसी प्रयास में रहता है भले ही किसी दूसरे का अपमान हो जाए कई लोग दूसरे को अपमान कर उसे सीढी बनाकर सम्मान का मंजिल पा लेते हैं, ऐसे लोगों को ही दक्ष कहा जाता है। उन्होंने कहा कि दक्ष का मतलब ही अभिमान है।
आचार्य जी ने कहा कि पुराणों के अनुसार भगवान ब्रह्मा का पुत्र प्रजापति नायक बनने के बाद ब्राह्मण सभा का आयोजन किया सभा में सभी देवता ऋषि मुनि उपस्थित हुए सभा में दक्ष के आने पर सभी लोग सम्मान में खड़े हो गए परंतु भगवान शिव ध्यान में होने के कारण खड़े नहीं हुए, प्रजापति दक्ष ने स्वयं को अपमानित समझकर क्रोधित हुआ और शिव को श्राप दे दिया।

शिव ध्यान में रहने के कारण कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन दक्ष को श्राप देने की सजा तुरंत मिल गई वीरभद्र ने उसके सर को काट दिया तब भगवान शिव ने दक्ष के सिर में बकरे का सिर जोड़कर उसे पुनर्जीवित कर दिया ।

आचार्य जी ने कहा की दक्ष के मन में सम्मान पाने की इच्छा के कारण ही उस पर संकट आया इसलिए ज्यादा इच्छा नहीं करनी चाहिए!
कथा के इस प्रसंग का श्रवण करते श्रद्धालुओं के साथ इस अवसर पर, देशराज तिवारी, रामबुझारत तिवारी, देशराज तिवारी, उदयराज तिवारी, रघुराज तिवारी, राजेश तिवारी, अमरेश तिवारी आदि सहित भारी संख्या मे श्रोता मौजूद रहे।




