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विंध्याचल पर्वत का अस्तित्व खतरे, अभी नहीं हुए सार्थक प्रयास तो बन जायेगा इतिहास

विंध्याचल। विंध्य पर्वत के अस्तित्व बचाने के लिए सार्थक प्रयास जरूरी हैं। देखा जाए तो कुछ वर्षों से विंध्य पर्वत पर कतिपय बाबाओं द्वारा आश्रम के नाम पर विंध्याचल के विंध्य पर्वत के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है!

इतनी तेजी से मोतिया तालाब , गेरुआ तालाब, सीता कुंड के ऊपर, अंधभक्त नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी गिरफ्त में ले कर इन बाबाओं द्वारा पूरे पहाड़ पर जगह जगह आश्रम के नाम पर पहाड़ का दोहन और खनन किया जा रहा है!

मां विंध्यवासिनी धाम का अस्तित्व विंध्य पर्वत के कुंड झरने जंगल से जुड़ा है! आलम यह है की अधिकारियों नेताओं की हनक दिखाकर इन बाबाओं द्वारा अवैध रूप से पहाड़ों का खनन कर कर आश्रमों का निर्माण कराया जा रहा है!

विंध्याचल में तमाम सामाजिक संगठन कार्य कर रहे हैं और यहां का प्रमुख समाज की खामोशी इस बात की गवाह है कि अभी तक लोग उदासीनता दिखा रहे हैं! विंध्याचल पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की जहां शासन प्रशासन की मंशा है वही कतिपय बाबाओं द्वारा पहाड़ की सुंदरता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

3! विंध्याचल के लिए गंभीर संकट का विषय है विनम्र निवेदन के साथ मैं कहना चाहता हूं की नगर की नुमाइंदगी इसी विंध्याचल से विधायक के रुप में की जा रही है इस गंभीर मुद्दे पर हमारे नगर विधायक विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग श्री विंध्य पंडा समाज के लोग ! सर्व समाज के लोग पर्यावरण से जुड़े लोग! विंध्य पर्वत के अस्तित्व को बचाने के लिए तुरंत सक्रिय होने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से एक महा बैठक बुलानी चाहिए।

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